प्रयागराज। सोरांव के कस्तूरबा गांधी विद्यालय में अनामिका शुक्ला के नाम से नौकरी करने वाली फर्जी शिक्षिका के बारे में चौंकाने वाली बात सामने आई है। जांच के दौरान सामने आया है कि फर्जी शिक्षिका भर्ती के लिए हुई काउंसलिंग में शामिल ही नहीं हुई। इसके बावजूद उसे नियुक्तिपत्र जारी कर दिया गया।
अन्य जिलों की ही तरह सोरांव स्थित कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालय में भी अनामिका शुक्ला के दस्तावेज पर किसी अन्य शिक्षिका के नौकरी करने की बात सामने आई थी। इस मामले में कर्नलगंज थाने में मुकदमा भी दर्ज हुआ, जिसकी जांच के दौरान लगातार चौंकाने वाले खुलासे हो रहे हैं। इसी क्रम में यह भी सामने आया कि अनामिका के नाम जो शिक्षिका स्कूल में नौकरी कर रही थी, वह भर्ती के लिए हुई काउंसलिंग में शामिल ही नहीं हुई। इसके बावजूद उसे नियुक्ति दे दी गई। जानकारों का कहना है कि कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय में शिक्षिकाओं की भर्ती के लिए जारी विज्ञापन में इस बात का भी उल्लेख होता है कि आवेदन करने वाले अभ्यर्थियों को काउंसलिंग के दौरान अपने मूल अभिलेखों के साथ चयन समिति के समक्ष उपस्थित होना होगा। दस्तावेजों के सत्यापन के बाद ही मेरिट के आधार पर नियुक्ति दी जाती है, लेकिन यहां बिना सत्यापन के ही नियुक्ति दे दी गई।
यही नहीं कार्यभार ग्रहण करने के दौरान भी मूल शैक्षिक अभिलेख नहीं देखे गए। ऐसे में संबंधित अफसरों की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठ रहे हैं। कर्नलगंज पुलिस का कहना है कि मामले की जांच की जा रही है। फिलहाल, अनामिका के नाम पर नौकरी करने वाली फर्जी शिक्षिका सरिता यादव के गिरफ्तारी के प्रयास किए जा रहे हैं।
आवेदन की प्रक्रिया चाहे जो हो, नियुक्ति से पहले अभ्यर्थी के दस्तावेजों का सत्यापन अनिवार्य होता है, जिसमें उसे उपस्थित होना पड़ता है। बिना काउंसलिंग में शामिल हुए किसी को नियुक्ति नहीं दी जा सकती। - रमेश तिवारी, मंडलीय सहायक निदेशक, बेसिक शिक्षा