ब्लड बैंकों की लापरवाही का भी उठाते थे फायदा
पुलिस की जांच पड़ताल में यह बात भी सामने आई है कि गिरोह के सदस्य ब्लड बैंकों की लापरवाही का भी फायदा उठाते थे। दरअसल प्लाज्मा के लिए फर्जी रेफरल लेटर बनाने के लिए वह एक और खेल करते थे। वह किसी भी अस्पताल के लेटर पैड के पर्चे पर सादा कागज रखकर फोटोकॉपी करा लेते थे। फिर इसी पर फर्जी नाम लिखकर दूसरा रेफरल लेटर बना लेते थे। जानकारों का कहना है कि नियमत: फोटोकॉपी रेफरल लेटर पर प्लाज्मा नहीं दिया जाना चाहिए। लेकिन लापरवाही के चलते ब्लड बैंकों की ओर से इन पर भी प्लाज्मा दे दिया जाता था।
सभी 10 आरोपी भेजे गए जेल
नकली प्लेटलेट्स बेचकर मरीजों की जान से खिलवाड़ करने वाले गिरोह के सरगना समेत सभी 10 लोग शनिवार को जेल भेज दिए गए। कोतवाली थाने में रात भर उनसे पूछताछ की जाती रही। शनिवार दोपहर बाद सभी को कोर्ट में पेश किया गया। जहां रिमांड अर्जी मंजूर होने के बाद उन्हें न्यायिक हिरासत में केंद्रीय कारागार नैनी भेज दिया गया। उधर फरार सदस्यों अजय सिंह व प्रदीप मौर्य की तलाश जारी है। अजय के बारे में पता चला है कि वह छात्रों को रुपयों का लालच देकर ब्लड बैंक से प्लाज्मा लेने के लिए भेजता था। जबकि प्रदीप सरगना का सहयोगी है।
सतीश का नहीं मिला सुराग
ग्लोबल अस्पताल में बाकराबाद बम्हरौली निवासी प्रदीप पांडेय की मौत के मामले में नामजद झलवा निवासी सतीश साहू का दूसरे दिन भी सुराग नहीं मिला। आरोप है कि सतीश ने ही मरीज के परिजनों को प्लेटलेट्स उपलब्ध कराए थे। आरोप यह भी है कि इसी प्लेटलेट्स को चढ़ाए जाने के बाद उनकी हालत बिगड़ी। धूमनगंज इंस्पेक्टर का कहना है कि उसकी तलाश की जा रही है।