Prayagraj News : पुलिस के हत्थे चढ़े नकली प्लेटलेट्स बेचने वाले गिरोह के सदस्य।
- फोटो : अमर उजाला।
वसूलते थे 10 गुना ज्यादा दाम
गिरोह के सदस्यों ने बताया कि वह 350 रुपये में प्लाज्मा खरीदकर प्लेटलेट्स के नाम पर 10 गुना ज्यादा दाम वसूलते थे। बताया कि 350 एमएल प्लाज्मा का पाउच 350 रुपये में ब्लड बैंकों से खरीदते थे। इसके बाद इससे 50-50 एमएल के सात पैकैट तैयार करते थे। फिर इन प्लाज्मा पाउच को प्लेट्लेट्स बताकर प्रत्येक के तीन से पांच हजार रुपये तक वसूलते थे।
Prayagraj News : फर्जी प्लेटलेट्स की वायरल फोटो।
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अभियुक्तों में एक पूर्व एसआरएनकर्मी, दो लैब कर्मचारी
नकली प्लेटलेट्स बेचने के इस खेल में एसआरएन अस्पताल का पूर्व संविदाकर्मी व दो निजी पैथोलॉजी कर्मचारी भी शामिल हैं। गिरफ्तार अभियुक्तों में शामिल कोरांव का दिलीप शुक्ला एसआरएन का पूर्व लैब कर्मचारी है, जो संविदा पर तैनात रह चुका है। उसने मोती लाल नेहरू मेडिकल कॉलेज से डिप्लोमा इन मेडिकल लैबोरेटरी कोर्स किया है। इसके अलावा सरफराज व सुनील पांडेय पैथोलॉजीकर्मी हैं। सरफराज एसआरएन अस्पताल के पास स्थित ग्लोबल लैब जबकि सुनील झूंसी स्थित अराध्य पैथोलॉजी का कर्मचारी है। इसके अलावा गिरफ्तार विकास, प्रवीण व अभिषेक छात्र हैं जो अलग-अलग कॉलेजों से पढ़ाई कर रहे हैं। राघवेंद्र ने उन्हें रुपयों का लालच देकर अपने गिरोह में शामिल किया है।
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असुरक्षित प्लाज्मा हो सकता है खतरनाक
सीएमओ डॉक्टर नानक सरन का कहना है कि असुरक्षित तरीके से तैयार किया गया प्लाज्मा मरीज की जान के लिए खतरनाक हो सकता है। उन्होंने बताया कि खून से पृथक कर प्लाज्मा निकाले जाने की प्रक्रिया प्रशिक्षित डॉक्टरों के निर्देशन में बेहद सुरक्षित तरीके से अमल में लाई जाती है। इसके बाद प्लाज्मा को साफ स्थान पर नियमित तापमान पर स्टोर करना जरूरी है। ऐसा न करने पर यह खराब हो सकता है और चढ़ाए जाने पर सेहत के लिए खतरनाक हो सकता है। उनका कहना है कि गिरोह के लोगों की ओर से प्लाज्मा निकाले जाने और इसके रखरखाव में भी मानकों का पालन नहीं किया जाता था।