निर्गत फर्जी नियुक्ति पत्र पर दर्ज पत्रांक संख्या (यूपीएस 821) भी परिषद कार्यालय का पत्रांक नहीं है। उन्होंने बताया कि परिषद के फर्जी लेटर हेड पर परिषद के सचिव प्रयागराज के स्कैन किए गए हस्ताक्षर से राजीव रतन सिंह के नाम से जौनपुर में क्लर्क के पद पर फर्जी नियुक्ति पत्र जारी किया गया है। बोर्ड सचिव का कहना है कि इसके खिलाफ एफआईआर के लिए सिविल लाइंस थाने में तहरीर दी है, लेकिन पुलिस ने एफआईआर लिखने से मना कर दिया है।
बकौल शुक्ल, पुलिस का तर्क है कि मामला जौनपुर का है, इसलिए वहीं दर्ज कराएं। उन्होंने कहा कि जब यूपी बोर्ड की शिकायत दर्ज नहीं हो रही है तो आम जनता का क्या हाल होगा। वहीं, इंस्पेक्टर भानू प्रताप का कहना है कि घटना जौनपुर की है, इसलिए वहीं दर्ज कराना चाहिए।
...और भी तो नियुक्तियां नहीं हो गईं?
बोर्ड सचिव के फर्जी हस्ताक्षर से नौकरी दिलाने में कामयाब रहा गैंग कहीं पूरे प्रदेश में तो अपना जाल नहीं फैला चुका? सचिव का पत्र ऐसा ही संकेत दे रहा है। इसका खुलासा तभी संभव है, जब जांच हो, लेकिन अभी तो पुलिस एफआईआर ही नहीं लिख रही।