बिना वाद और पत्रावली के नामांतरण का आदेश कर दिया गया जारी
भू -माफिया ने जब जमीन खाली करने की धमकी रिटायर हाईकोर्ट रजिस्ट्रार अटल को मिली तो वह फूलपुर तहसील पहुंचे और खतौनी निकलवाई तो वह भौंचक रह गए। रिटायर रजिस्ट्रार और उनके भाइयों ने किसी को रजिस्ट्री किया ही नहीं था तो खतौनी से उनके नाम कैसे कट गए। 18 जनवरी 2025 को फूलपुर एसडीएम को शिकायती पत्र देकर न्याय की गुहार लगाई।
तहसीलदार ने मामले की जांच कराई तो तथ्य चौंकाने वाले निकले। प्रेषित जांच रिपोर्ट में दर्शाया गया कि 28 अगस्त 2024 को जिस न्यायालय के आदेश पर कंप्यूटर की खतौनी में नामांतरण आदेश फीड किया गया था। उस न्यायालय में न तो कोई वाद दायर है और न ही कोई पत्रावली उपलब्ध है। यही नहीं रजिस्ट्री दफ्तर में भी बैनामे से संबंधित कोई दस्तावेज नहीं मिला।
तहसीलदार ने दोषियों के विरुद्ध एफआईआर का दिया निर्देश
झूंसी। 23 जनवरी 2025 को रिपोर्ट मिलने पर तत्कालीन तहसीलदार ने एक फरवरी को नायब तहसीलदार को तत्काल फर्जी आदेश निरस्त करते हुए दोषी पेशकार व अन्य के खिलाफ तत्काल एफआईआर दर्ज कराने का आदेश जारी कर दिया। फर्जी बैनामा धारकों का नाम तो निरस्त हो गया लेकिन दोषियों के विरुद्ध एफआईआर नहीं दर्ज कराई गई। दोषियों के खिलाफ कार्रवाई के लिए रिटायर रजिस्ट्रार अटल ने अंततः कोर्ट की शरण ली है।
किसान को बेवजह मिल रही सजा
अफसरों की शिथिलता कह लीजिए या फिर मिलीभगत, ऐसे फर्जी कारनामों की वजह से रिटायर रजिस्ट्रार अटल को महीनों से शारीरिक, मानसिक और आर्थिक पीड़ा झेलनी पड़ रही वह अवर्णनीय है। फूलपुर तहसील के अधिवक्ताओं की मानें तो खतौनी में नाम गड़बड़ी की ढ़ेरों शिकायतें हैं और सैकड़ों अनावश्यक वाद लंबित चल रहे हैं।
इस मामले में एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया गया है। इस प्रकरण के लिए जिम्मेदार लोगों के बारे में जानकारी ली जा रही है। - सत्यपाल चौहान, प्रभारी तहसीलदार फूलपुर