इसके विपरीत, उसकी मां ने इस बात से इन्कार कर दिया। मां ने घटना की तिथि, समय या ऐसी किसी वारदात की जानकारी होने से ही मना कर दिया और जिरह में स्वीकार किया कि मामला शादी से मुकर जाने के कारण मुकदमा दर्ज कराया गया था। मेडिकल रिपोर्ट में दुष्कर्म की पुष्टि नहीं की गई थी।
इसके अलावा कोर्ट ने पीड़िता के आचरण को भी असामान्य माना। कहा कि यदि पीड़िता को जबरन दुपहिया वाहन पर बैठाकर ले जाया जा रहा था, तो उसने रास्ते में किसी से मदद मांगने का कोई प्रयास नहीं किया, जो कि एक सामान्य मानवीय आचरण के विपरीत है। वहीं, आरोपी की ओर से दलील दी गई थी कि विवाद स्कूटी की खरीदारी में पैसे के लेनदेन के कारण शुरू हुआ था। इस आरोप के बचाव में पीड़िता रुपये अदायगी का कोई सुबूत नहीं पेश कर सकी थी।