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High Court : दुष्कर्म के इरादे से जबरन ले जाते वक्त मदद की गुहार न लगाना अस्वाभाविक आचरण, आरोपी को बड़ी राहत

Sat, 23 May 2026 05:53 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज

सार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने शादी का झांसा देकर दुष्कर्म करने और जातिसूचक शब्दों से अपमानित करने के आरोपी की बेगुनाही के फैसले पर मुहर लगा दी।
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इलाहाबाद हाईकोर्ट - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने शादी का झांसा देकर दुष्कर्म करने और जातिसूचक शब्दों से अपमानित करने के आरोपी की बेगुनाही के फैसले पर मुहर लगा दी। कोर्ट कहा कि दुष्कर्म के इरादे से दोपहिया वाहन से ले जाते वक्त पीड़िता की ओर किसी से मदद की गुहार न लगाना अस्वाभाविक आचरण है। यह फैसला न्यायमूर्ति सलिल राय और न्यायमूर्ति देवेंद्र सिंह प्रथम की खंडपीठ ने पीड़िता की ओर से ट्रायल कोर्ट के फैसले को चुनौती देने वाली अपील को खारिज करते हुए सुनाया है। मामला जौनपुर के लाइन बाजार थाना क्षेत्र का है।

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पीड़िता ने आरोपी के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई थी। आरोप लगाया कि आरोपी ने पहले से शादीशुदा और दो बच्चों का पिता होने की बात छुपाई। शादी का झूठा झांसा देकर उसके साथ शारीरिक संबंध बनाए। इसके बाद उसे जबरन अपनी मोटरसाइकिल पर बैठाकर हुसैनबाद कॉलोनी ले गया, जहां उसने दुष्कर्म किया और घटना का वीडियो सोशल मीडिया व फर्जी फेसबुक आईडी पर पोस्ट कर दिया।

जौनपुर की ट्रायल कोर्ट ने गवाहों के बयानों में विरोधाभास, अभियोजन की कहानी के चिकित्सा साक्ष्य से समर्थित न होने के आधार पर आरोपी को बरी कर दिया। इसके खिलाफ पीड़िता ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। हाईकोर्ट ने ट्रायल कोर्ट के फैसले को सही माना। पाया कि पीड़िता ने अपने बयान में कहा था कि एफआईआर दर्ज कराते समय उसकी मां और भाई भी उसके साथ थाने गए थे।

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इसके विपरीत, उसकी मां ने इस बात से इन्कार कर दिया। मां ने घटना की तिथि, समय या ऐसी किसी वारदात की जानकारी होने से ही मना कर दिया और जिरह में स्वीकार किया कि मामला शादी से मुकर जाने के कारण मुकदमा दर्ज कराया गया था। मेडिकल रिपोर्ट में दुष्कर्म की पुष्टि नहीं की गई थी।

इसके अलावा कोर्ट ने पीड़िता के आचरण को भी असामान्य माना। कहा कि यदि पीड़िता को जबरन दुपहिया वाहन पर बैठाकर ले जाया जा रहा था, तो उसने रास्ते में किसी से मदद मांगने का कोई प्रयास नहीं किया, जो कि एक सामान्य मानवीय आचरण के विपरीत है। वहीं, आरोपी की ओर से दलील दी गई थी कि विवाद स्कूटी की खरीदारी में पैसे के लेनदेन के कारण शुरू हुआ था। इस आरोप के बचाव में पीड़िता रुपये अदायगी का कोई सुबूत नहीं पेश कर सकी थी।
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