इलाहाबाद विश्वविद्यालय की सेमेस्टर परीक्षाओं की मूल्यांकन प्रक्रिया में अब बाहरी शिक्षकों की भूृमिका खत्म कर दी गई है। लिखित और मौखिक परीक्षा दोनों में छात्र-छात्राओं का मूल्यांकन विश्वविद्यालय के शिक्षक ही करेंगे। यह व्यवस्था आगामी सत्र से लागू होगी। मूल्यांकन तथा परिणाम घोषित होने में देरी के मद्देनजर यह फैसला लिया गया है। हालांकि स्नातक की वार्षिक परीक्षाओं में यह व्यवस्था लागू होगी या नहीं इसे लेकर विवाद बना हुआ है।
विश्वविद्यालय की स्नातक और परास्नातक परीक्षाओं में छात्र-छात्राओं के मूल्यांकन में अभी वाह्य शिक्षकों की महत्वपूर्ण भूमिका है। लिखित और मौखिक परीक्षा दोनों में 50 फीसदी बाहरी शिक्षकों को बुलाने का प्रावधान है। यह व्यवस्था पक्षपात रोकने के लिए की गई है लेकिन बाहरी परीक्षकों की वजह से मूल्यांकन में देरी की भी लगातार शिकायत बनी हुई है। इसकी वजह से कई विषयों का परिणाम देर से घोषित हो पाता है। दो साल पहले तो एक विषय की कॉपी गायब हो गई। विश्वविद्यालय में परास्नातक में आगामी सत्र से क्रेडिट बेस्ड च्वॉयस सिस्टम (सीबीसीएस) लागू हो जाएगा। इसके तहत एक सत्र में दो सेमेस्टर होंगे। इस तरह से साल में दो बार परीक्षा होगी। इसके अलावा सेमेस्टर प्रारूप में 40 नंबर की लिखित परीक्षा होगी। 20 अंक का ट्यूटोरियल, 20 नंबर के टेस्ट तथा 20 ही अंक का आंतरिक मूल्यांकन होगा। यानी, मूल्यांकन के कई चरण होंगे। ऐसे में बाहरी शिक्षकों से मूल्यांकन कराने पर और देरी की आशंका व्यक्त की जा रही है। इसके मद्देनजर सिर्फ विश्वविद्यालय के शिक्षकों से मूल्यांकन कराने का निर्णय लिया गया है। इससे समय से मूल्यांकन और रिजल्ट घोषित होने के दावे किए जा रहे हैं। हालांकि, एकेडमिक काउंसिल की बैठक में हुए इस फैसले के मद्देनजर विश्वविद्यालय के ऑर्डिनेंस में भी बदलाव करना होगा।