ऑल इंडिया मजदूर सभा (एआईकेएमएस) के तीसरे अखिल भारतीय सम्मेलन के दूसरे दिन मौजूदा कृषि संकट पर चर्चा की गई। राजर्षि टंडन मंडपम के कामरेड मदाला नारायण स्वामी के नाम पर रखे हाल में बांबे उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश बीजी कोलसे पाटिल ने कहा कि देश की शासक वर्गीय पार्टियों की नीतियों ने कृषि क्षेत्र को गहरे संकट में ढकेल दिया है। इसके चलते देश के कई लाख किसान विकट आर्थिक संकट एवं सामाजिक परिस्थितियों से जूझ रहे हैं। किसान आत्महत्या कर रहे हैं। मौजूदा सरकार भी परिस्थितियों को बदलना नहीं चाहती है। वह पांच साल के भीतर कृषि आय को दोगुना करने का वादा तो कर रही है, लेकिन उसका यह वादा छलावा मात्र है।
पूर्व न्यायाधीश ने कहा कि कृषि में बहुराष्ट्रीय कंपनियों को बढ़ावा दिया जा रहा है। किसानों को दी जाने वाली सब्सिडी के बारे में स्वामीनाथन कमेटी द्वारा तय किए गए न्यूनतम समर्थन मूल्य का हवाला देते हुए कहा कि फसलों के दिए जाने वाले वास्तविक मूल्य से किसानों को एक साल में 10 लाख रुपये अधिक का नुकसान हुआ है। इसके पूर्व कार्यक्रम की शुरुआत एआईकेएमएस के राष्ट्रीय अध्यक्ष एचएस संधू ने ध्वजारोहण कर की। इसके बाद ‘कम्युनिस्ट इंटरनेशनल’ के सामूहिक गान द्वारा सलामी पेश की गई। संगठन के महासचिव ने सुशांत ने शहीदों को माल्यार्पण किया।
खुले सत्र की अध्यक्षता न्यायमूर्ति जनार्दन सहाय ने की। इफ्टू के व्यास तिवारी, प्रोग्रेसिव आर्गनाइजेशन ऑफ वुमेन की झांसी, प्रो. ईश मिश्रा, अरुणोदय से रामाराव, नौजवान भारत सभा के रमिंदर, प्रदीप, इविवि की छात्रसंघ अध्यक्ष ऋचा सिंह, प्रो. कैलाश शर्मा, भारतीय किसान यूनियन एकता के जोगिंदर सिंह आदि ने संबोधित किया। खुले सत्र में एक अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधि फिलीपिंस वर्कर्स मूवमेंट की सिल्विया मल्लारी ने हिस्सा लिया। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य में किसानों के आंदोलनों की चर्चा की। नेपाल किसान संगठन के नेता भूमीश्वर कंडेल का लिखित वक्तव्य डॉ. आशीष मित्तल ने पढ़ा। खुले सत्र के बाद तकनीकी सत्र चले। इसमें डॉ. आशीष मित्तल ने प्रतिनिधियों के सम्मुख देश के किसानों के नाम आह्वान दस्तावेज पेश किया।