कोरोना महामारी के गंभीर संकट के बीच इस वर्ष चीनी सामानों का पूर्ण बहिष्कार के चलते भले ही चीन को सीधे तौर पर 40 हजार करोड़ रुपये का व्यापार घाटा हुआ हो लेकिन इस घाटे की भरपाई होने लगी है। चीनी उत्पादों का ज्यादा विकल्प न मिलने की वजह एक बार फिर से बाजार में इनकी बिक्री तेज हो गई है। ऑटो पार्टस और सर्जिकल आइटम में चीनी कंपनियों की ज्यादा पैठ है। तमाम प्रतिबंध होने की वजह से एवं मांग को पूरा करने के लिए आयातकों और चीन की कंपनियों ने मिलकर सिंगापुर और ताइवान के रास्ते भारत में माल भेजना शुरू कर दिया है।
भारत-चीन सीमा विवाद के बाद ही चाइनीज प्रोडक्ट के बहिष्कार की मुहिम प्रयागराज समेत देश के तमाम शहरों में हुई। इसका असर यह रहा कि दिवाली त्योहार सीजन बिक्री से देश भर में हुए कारोबार से चीन को सीधे तौर पर तगड़ा झटका लगा, लेकिन उस घाटे की भरपाई अब चीनी कंपनियां करने लगी हैं।
एलईडी पैनी, ऑटो पार्टस, मोबाइल एसेसरीज, ब्यूटी प्रोडक्ट, कंप्यूटर एवं लैपटाप आदि पर सरकार ने चीन से आयात पर जहां पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया था, लेकिन देश में संबंधित वस्तुओं का ज्यादा निर्माण न होने एवं बढ़ती मांग के चलते आयातकों और चीन की कंपनियों ने मिल कर सिंगापूर और ताइवान के रस्ते भारत में माल भेजना शुरू कर दिया है। लंबा रास्ता तय करने की वजह से संबंधित वस्तुओं के दाम में जहां वृद्धि हुई है तो वहीं चीनी कंपनियां भी करोड़ों का मुनाफा कमा रही हैं।
मेड इन चाइना
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चीन की पैकिंग को हटाकर नए नाम से माल कर रहे पैक
कंफेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स के प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र गोयल बताते हैं कि प्रयागराज में मोबाइल के सामान, स्टेशनरी, ऑटो पार्ट्स, इलेक्ट्रिक गुड्स, केमिकल उत्पाद आदि वर्तमान में चीन के खपत हो रहे हैं। आयातकों ने अब चीन की पैकिंग को हटा कर अपने नाम से माल को पैक करना आरंभ कर दिया है। इस वजह से उसके मूल देश का पता नहीं चलता है। कुछ चीनी मोबाइल फोन निर्माता कंपनियों ने बड़े अक्षरों में मेड इन इंडिया लिखना शुरू कर दिया है। प्रयागराज में चीन की कंपनियों का खुद का कोई वेयरहाउस नहीं है, लेकिन चीन से आने वाली माल की साप्ताहिक खपत एक अनुमान के मुताबिक तैयार एवं कच्चे माल के रूप में 50 से 70 करोड़ के आसपास थी, जो पुन: धीरे धीरे उसी जगह पहुंच रही है।
सर्जिकल आइटम में 90 फीसदी चीनी उत्पाद
प्रयागराज के तमाम मेडिकल स्टोर पर मिलने वाले सर्जिकल प्रोडक्ट में अभी भी चीनी कंपनियों का ही कब्जा है। प्रयाग केमिस्ट एसोसिएशन के अध्यक्ष लालू मित्तल बताते हैं कि ऑक्सीमीटर, हैंड ग्लब्स, बीपी मशीन, पैथोलॉजी किट समेत तमाम मेडिकल उपकरण पर अब भी चाइना पर भी निर्भरता है। पैथोलॉजी में होने वाली विभिन्न जांच में प्रयोग होने वाले केमिकल भी चाइना से ही आ रहे हैं। कोई विकल्प न होने की वजह से मजबूरी में लोगों इन चीनी उपकरण खरीदने के लिए बाध्य होना पड़ रहा है। कोरोना काल में पीपीई किट, सैनिटाइजर ही ऐसे प्रोडक्ट हैं जो भारतीय कंपनियों द्वारा पर्याप्त मात्रा में बनाए जा रहे हैं।
ऑटो पार्टस में नहीं टूट पा रहा वर्चस्व
कोरोना वायरस के चलते चीन से ऑटो पार्ट्स की आपूर्ति भले ही प्रभावित हुई लेकिन अब बाजार में यह पार्टस आसानी से मिल जा रहे हैं। प्रयागराज ऑटोमोबाइल्स एसोसिएशन के अध्यक्ष सुशील खरबंदा ने बताया कि पिछले वर्ष नवंबर माह में ही चीन में कोराना मरीज मिलने के बाद से ही वहां से आने वाले माल की सप्लाई प्रभावित हो गई थी। इसके बाद लॉक डाउन और चीनी कंपनियों पर प्रतिबंध लगा। अनलॉक होने के बाद ऑटो पार्टस की सप्लाई शुरू तो हुई लेकिन मांग के अनुरूप पार्टस नहीं मिल पा रहे हैं। चीन की बजाय ताइवान से माल आने की वजह से ऑटो पार्टस के दाम भी बढ़े हुए हैं। कुछ भारतीय कंपनियों ने ऑटो पार्टस बनाना शुरू किया है लेकिन अभी उसकी क्वालिटी पर सवाल उठ रहे हैं। यही हाल मोबाइल बाजार का भी है। ऑल इंडिया मोबाइल रिटेलर एसोसिएशन के जोनल वाइस प्रेसिडेंट विपिन गुप्ता बताते हैं कि प्रयागराज में 70 फीसदी बाजार चीनी मोबाइल कंपनियों का है।