डॉ. अखिलेश मिश्र
प्रयागराज। अब दसवीं में बेसिक मैथ पढ़ने वाले छात्र-छात्राएं ग्यारहवीं में गणित विषय का चुनाव नहीं कर सकेंगे। सीबीएसई ने स्पष्ट किया है कि बेसिक मैथ पढ़ने वाले कंपार्टमेंट परीक्षा देकर ही ग्यारहवीं में गणित ले सकते हैं। बोर्ड 2020 से दसवीं गणित की दो परीक्षा लेने जा रहा है। पहली बेसिक और दूसरी स्टैंडर्ड गणित की परीक्षा होगी।
इन दिनों सीबीएसई स्कूलों में परीक्षा फार्म भरे जा रहे हैं। स्कूलों में परीक्षार्थियों और अभिभावकों को बताया जा रहा है कि जो छात्र दसवीं में बेसिक गणित पढ़ेंगे, वह ग्यारहवीं में गणित विषय नहीं पढ़ पाएंगे। बोर्ड ने स्पष्ट किया कि यदि ग्यारहवीं में गणित (पीसीएम, पीसीबी, कामर्स के साथ गणित) लेकर अध्ययन करना चाहते हैं तो दसवीं में स्टैंडर्ड गणित का चयन करना होगा। विद्यार्थी बेसिक अथवा स्टैंडर्ड गणित में जो विक ल्प देंगे, उसी की परीक्षा देनी होगी। सीबीएसई के परीक्षा नियंत्रक डॉ. संयम भारद्वाज की ओर से जारी सूचना में कहा गया है कि बेसिक गणित पढ़ने वाले छात्र प्लस टू में गणित नहीं ले पाएंगे। ऐसे छात्र अगर बेसिक गणित में अच्छे अंक प्राप्त कर लेते हैं और 11वीं में गणित लेना चाहते हैं तो उन्हें इसके लिए जुलाई में होने वाली 10वीं की कंपार्टमेंटल परीक्षा में शामिल होना होगा। कंपार्टमेंटल परीक्षा में पास होने के बाद ही उन्हें 11वीं में गणित मिल सकती है। सीबीएसई की ओर से पहली बार पास विषय में कंपार्टमेंटल देने का मौका दिया जा रहा है।
पाठ्यक्रम एक, प्रश्नपत्र अलग-अलग
0 सीबीएसई की ओर से बेसिक और स्टैंडर्ड गणित के पाठ्यक्रम और किताब में कोई बदलाव नहीं किया गया है। पाठ्यक्रम एक जैसा रहेगा, बस प्रश्नपत्र में बदलाव रहेगा। बेसिक गणित के प्रश्न आसान और स्टैंडर्ड गणित के प्रश्न कठिन और कांस्पेट पर आधारित हाेंगे। बोर्ड ने विद्यालयों में पढ़ाई और परीक्षा के दौरान इस बात का ध्यान रखने का निर्णय लिया है।
गणित में कमजोर हों तो बेसिक का विकल्प चुनें
0 महर्षि पतंजलि विद्या मंदिर की प्रधानाचार्या सुष्मिता कानूनगो का कहना है कि बोर्ड ने छात्रों को सलाह दी है कि यदि उनकी गणित में रुचि हो तभी गणित पढ़ें। जो गणित से डरते हैं अथवा उनकी रुचि गणित में नहीं है और कमजोर हैं, वह छात्र बेसिक गणित का विकल्प चुनें। इन छात्रों को बोर्ड ने गणित में पास होेने का विकल्प दिया है। उन्होंने बताया कि अभिभावकों को नोटिस भेजकर उनसे सहमति ली जा रही है कि उनके बच्चे को बेसिक अथवा स्टैंडर्ड में कौन सा विकल्प चुनना है।