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स्किल्ड लेबर के लिए भी काम का संकट

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1. मेजा के भसुंदरा कला गांव के राजेंद्र प्रसाद मुंबई में कपड़े की कंपनी में कार्यरत थे। कंपनी बंद होने के बाद किसी तरह से यहां आए गए। अब मजदूरी के लिए भी तैयार हैं लेकिन मनरेगा में पंजीकृत नहीं होने की वजह से काम के लिए भी भटक रहे हैं।
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2. हंडिया के महेश सूरत में हैंडलूम में छपाई का काम करते थे। काम बंद होने पर कुछ दिन पहले चले आए। अब यहां फावड़ा उठाने के लिए भी तैयार हैं लेकिन उनकी राह भी आसान नहीं है।
लॉकडाउन में बेरोजगार होने वाले मात्र ये दो उदाहरण नहीं हैं। हजारों हुनरमंदों को अपनी नौकरी गंवानी पड़ी है और उनके सामने रोजगार का संकट है। कोरोना महामारी काल में तो कई परिभाषाएं और मान्यताएं भी बदल गई हैं। स्किल्ड होना रोजगार की गारंटी माना जाता है लेकिन इस समय इसकी कोई अहमियत नहीं है। उल्टे हुनरमंद होना रोजगार में बाधा बन गया है। ऐसे कामगारों के सामने काम का गंभीर संकट है। मनरेगा, निर्माण क्षेत्र में काम शुरू किए गए हैं लेकिन, स्किल्ड लेबर के लिए अभी कोई काम नहीं है। ऐसे में ये मजदूरी के लिए मजबूर हैं मगर, यह भी आसानी से नसीब नहीं है।
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प्रतापपुर के बसनेटा गांव की प्रधान फूलपत्ती देवी का कहना है कि उनके गांव में महाराष्ट्र से कुछ लोग आए हैं। वहां अलग-अलग कारखाने में काम करते थे। उन्हें आए कई दिन हो गए हैं और काम मांग रहे हैं। वे मनरेगा के तहत भी काम करने के लिए तैयार हैं लेकिन वह भी बंद है। फूलपत्ती का कहना है कि वह मनरेगा के तहत गांव में सड़क बनवाना चाहती हैं लेकिन बीडीओ इसे संस्तुति नहीं दे रहे। बीडीओ का कहना है कि तालाब और नाले के लिए ही बजट स्वीकृत हुआ है। ऐसे में गतिरोध बना हुआ है। प्रशासन तथा श्रम विभाग के अफसरों का कहना है कि स्किल्ड लेबर की अलग सूची तैयार की जा रही है। डाटा सरकार को भेजा जा रहा है। उनके हुनर के अनुसार काम उपलब्ध कराने की योजना है लेकिन कब तक अभी अफसरों के पास इसका कोई जवाब नहीं है।
झटके में छूटी इंजीनियर की नौकरी
नेवादा के धर्मेश कुमार गौर मिर्जापुर की एक कंपनी में इंजीनियर थे। यह कंपनी मिर्जापुर में विभिन्न योजनाओं के तहत खंभे लगाने तथा बिजली के अन्य उपरणों की आपूर्ति करती है। धर्मेश का कहना है कि वह छुट्टी में यहां आए थे लेकिन अगले दिन ही लॉकडाउन लागू हो गया। इसकी वजह से ड्यूटी पर नहीं जा पाए। अब कंपनी ने शुक्रवार को बर्खास्त कर दिया। धर्मेश ने बताया कि उनकी मां कैंसर की मरीज हैं। ऐसे में नौकरी चली जाने से बड़ी समस्या हो गई है। उन्होंने प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री, उप मुख्यमंत्री को ट्विट करने के अलावा श्रम तथा अन्य विभाग में शिकायत की है।
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