पोस्ट टीबी के कितने मरीजों के फेफड़े की कार्यक्षमता में मिली परेशानी
1-अवरोधक श्वसन दोष के 312 मरीजों को लिया गया, इनमें 52 फीसदी के फेफड़ों में समस्या पाई गई।
2-सीमित फेफड़े की बीमारी 192 मरीजों में 32 फीसदी मरीजों में मिली समस्या।
3-मिश्रित श्वसन दोष (ऑब्सट्रक्टिव + रिस्ट्रिक्टिव) 96 मरीजों में 16 फीसदी मरीजों में मिली परेशानी।
क्या है उपाय
1-धूम्रपान को पूरी तरह बंद करना।
2-ग्रामीण क्षेत्रों में बायोमास ईंधन (लकड़ी, उपले, धुआं आदि) के संपर्क से बचाव करना।
3-टीबी उपचार पूर्ण होने के बाद मरीजों की पल्मोनरी फंक्शन टेस्ट (पीएफटी) कराई जानी चाहिए ताकि फेफड़ों की वास्तविक कार्यक्षमता का आकलन किया जा सके।
4-मरीज को लगातार खांसी या सांस फूलने जैसी शिकायत हो, तो तुरंत चिकित्सकीय परामर्श लेना चाहिए।
अध्ययन का उद्देश्य टीबी के बाद फेफड़ों की कार्य क्षमता का मूल्यांकन करना और ग्रामीण व शहरी मरीजों के साथ-साथ धूम्रपान करने वाले और न करने वाले मरीजों की तुलना करना रहा। पोस्ट-ट्यूबरकुलोसिस लंग डिजीज के प्रति जागरूकता बढ़ाने की आवश्यकता है क्योंकि टीबी से ठीक होने के बाद भी अनेक मरीज लंबे समय तक श्वसन संबंधी समस्याओं से पीड़ित रहते हैं। - डॉ. तारिक महमूद, एमडी, विभागाध्यक्ष, श्वसन रोग विभाग, मोती लाल नेहरु मेडिकल कॉलेज।