इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एनएचएआई को दो बार समय देने के बाद भी जवाबी हलफनामा न जमा करने पर नाराजगी जताई है। कोर्ट ने कहा कि यह अंतिम मौका है इस बार जवाबी हलफनामा न जमा करने पर मान लिया जाएगा कि जानबूझकर एनएचएआई सच्चाई छुपा रहा है। विरेंद्र कुमार शर्मा व अन्य की ओर से दायर याचिका की सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति मनोज कुमार गुप्ता व न्यायमूर्ति क्षितिज शैलेंद्र की कोर्ट ने यह आदेश दिया है।
मामले में मेरठ निवासी याची विरेंद्र कुमार शर्मा व अन्य की ओर से मुआवजे की मांग को लेकर एनएचएआई के खिलाफ इलाहाबाद हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई है। इसपर एनएचएआई से जवाब मांगा गया था। दो बार समय दिए जाने के बाद जवाबी हलफनामा जमा नहीं किया जा सका। वहीं एनएचआई के अधिवक्ता आरके जायसवाल ने अतिरिक्त समय देने के लिए कोर्ट से अनुरोध किया।
कोर्ट ने इस पर नाराजगी जताते हुए कहा कि जवाबी हलफनामा दाखिल करने का यह अंतिम मौका है। इस बार जवाबी हलफनामा न जमा किया गया तो मान लिया जाएगा कि एनएचएआई की ओर से सच्चाई छुपाई जा रही है। न्यायालय इस मामले की सुनवाई के लिए अगली तिथि 16 मई निर्धारित की है।