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Prayagraj News: महाकुंभ में रूस-यूक्रेन की मिटी दुश्मनी, टूटीं सरहद की दीवारें

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रूसी हमले में सबकुछ तबाह होने के बाद यूक्रेन के खारकीव निवासी एलेक्जेंड्रा सनातन धर्म को आचार-विचार-व्यवहार की दुनिया की सबसे बड़ी छतरी मानकर विश्व समुदाय को एकजुट कर रहे हैं। श्रीपंच दशनाम जूना अखाड़े के महामंडलेश्वर की पदवी से विभूषित होने के बाद दुनिया भर में पांच हजार से अधिक शिष्य-शिष्याओं की मंडली तैयार कर वह सनातन धर्म की अलख जगा रहे हैं। महाकुंभ में संगम लोअर मार्ग पर वर्ल्ड वाइड सनातन धर्म कम्युनिटी के नाम से कीव, खारकीव के अलावा रूस के मास्को शहर के संत कुटिया बनाकर भक्तों को वैश्विक एकता और शांति का संदेश दे रहे हैं। उनका मानना है कि रूस-यूक्रेन जंग राजनीतिक विवाद की देन है। दोनों देशों के साधु-संतों के बीच कोई कटुता नहीं है। दोनों देशों के संतों ने महाकुंभ में आकर सरहद की दीवारें मिटा दी हैं।
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जूना अखाड़े के ब्रह्मलीन महामंडलेश्वर सोमनाथ गिरि उर्फ पायलट बाबा से दीक्षा लेने के बाद नागा संन्यासी बने विष्णुदेवानंद फिलहाल भीषण युद्ध की वजह से रूस में ही शरण लिए हुए हैं। इन दिनों महाकुंभ में संगम लोअर मार्ग पर प्रयागराज मेला प्राधिकरण ने उन्हें भूमि-सुविधाएं प्रदान की हैं।

उनके शिविर में रुस, यूक्रेन, जर्मनी, जापान समेत कई देशों के युवा संत और संन्यासिनियां सनातन को समझने का प्रयास कर रहे हैं। शनिवार को अमर उजाला से बातचीत में उन्होंने बताया कि दोनों देशों के लोगों में आपस में बहुत प्रेम और लगाव है। युद्ध राजनीतिक कारणों से हो रहा है। यह युद्ध मानवता के लिए रोका जाना चाहिए। इसके लिए संगम पर गंगा, यमुना और अदृश्य सरस्वती से वह लगातार प्रार्थना कर रहे हैं।
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वह बताते हैं कि तीन वर्ष में यूक्रेन में हजारों निर्दोष लोगों की जान जा चुकी है। वह रॉकेट हमले में चर्च और अस्पताल भी तहस-नहस हो चुके हैं। सब कुछ बर्बाद हो चुका है। जमीनें धंस गई हैं और हर तरफ घरों की खिड़कियां टूटी हुई हैं। युद्ध में हुए नुकसान पर यूक्रेन की योगमाता कहती हैं कि हम लोग बहुत दुखी हैं। समझ नहीं आ रहा है कि आखिर यह जंग कब खत्म होगी। मैं लोगों को मरते नहीं देखना चाहती। मुझे लड़ाई नहीं चाहिए। यूक्रेन और रूस तो भाई-भाई हैं । फिर रूस हमको क्यों मार रहा है। उसे रोका जाना चाहिए।
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