कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) ने पीएफ निकासी व्यवस्था में महत्वपूर्ण बदलाव किए हैं। इनका सीधा असर कर्मचारियों पर पड़ेगा। नौकरी छूटने की स्थिति में कर्मचारी अपने पीएफ बैलेंस का 75 फीसदी तक निकाल सकेंगे।
कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) ने पीएफ निकासी व्यवस्था में महत्वपूर्ण बदलाव किए हैं। इनका सीधा असर कर्मचारियों पर पड़ेगा। नौकरी छूटने की स्थिति में कर्मचारी अपने पीएफ बैलेंस का 75 फीसदी तक निकाल सकेंगे। शेष 25 फीसदी राशि एक वर्ष बाद निकाली जा सकेगी।
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इस बदलाव का उद्देश्य कर्मचारी की सेवानिवृत्ति के लिए कुछ रकम सुरक्षित रखना है। ईपीएफओ के अनुसार, बार-बार निकासी से अंतिम निपटान के समय बहुत कम राशि बचती थी। अब पात्र आंशिक निकासी के लिए 12 महीने की समान न्यूनतम सेवा अवधि का प्रावधान है। पहले कुछ मामलों में सात वर्ष तक की अवधि लागू थी।
क्षेत्रीय भविष्य निधि आयुक्त राहुल वर्मा के अनुसार, केंद्रीय मंत्रिमंडल ने ईपीएफओ कवरेज के लिए वेतन सीमा बढ़ाने को मंजूरी दी है। यह सीमा 15 हजार रुपये से बढ़ाकर 25 हजार रुपये प्रतिमाह की गई है। इससे 51 लाख से अधिक अतिरिक्त कर्मचारी ईपीएफओ के दायरे में आएंगे। उन्हें भविष्य निधि बचत, कर्मचारी पेंशन योजना और बीमा सुरक्षा का लाभ मिलेगा।