लिहाजा, कोर्ट ने बुद्धिराम के मामले में स्थापित विधि व्यवस्था का हवाला देते हुए याचिका स्वीकार कर ली। कहा कि पेंशन योजना का लाभ पाने के हकदार वह सभी लोग हैं जो 1964 की पेंशन नियमावली के दायरे में आते हैं। कोर्ट ने याची को दो माह के भीतर ब्याज समेत अंशदान जमा करने की मोहलत दी है। साथ ही सरकार को आदेश दिया है कि अंशदान जमा होने के बाद चार माह में याची की पेंशन योजना का लाभ प्रदान किया जाए।
उत्तर प्रदेश सरकार ने 1964 से ऐसे शासकीय सहायता प्राप्त निजी विद्यालयों के अध्यापकों व कर्मचारियों को भी पेंशन देने का निर्णय लिया था जो मान्यता प्राप्त थे। इस बबात 22 मई 2006 के शासनादेश में अंशदान जमा करने के लिए कट ऑफ डेट जारी की गई थी। इसके बाद हाइकोर्ट के आदेश के अनुपालन में यह समय सीमा 5 फरवरी 2017 के शासनादेश से बढ़ा दी गई थी। गौरतलब है कि अंशदान (जीपीएफ/सीपीएफ) जमा करने वाले कर्मचारी ही पेंशन योजना का लाभ पा सकते है। सरकारी सहायता प्राप्त निजी विद्यालयों के शैक्षणिक और गैर शैक्षणिक कर्माचरियों की समान रूप इस योजना का लाभ पाने के अधिकारी है।