फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

इंटरमीडिएट तक के सभी शासकीय सहायता प्राप्त विद्यालयों के कर्मचारी पेंशन पाने के हकदार- हाईकोर्ट

Mon, 13 Sep 2021 08:48 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज

सार

इलाहाबाद हाईकर्ट ने अपने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा कि 1964 की पेंशन नियमावली के दायरे में आने वाली सभी शिक्षण संस्थाओं के अध्यापकों व कर्मचारियों को योजना का लाभ दे सरकार। सिर्फ उच्च प्राथमिक विद्याललयो तक योजना को सीमित रखना उचित नहीं है।
विज्ञापन
इलाहाबाद हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है कि शासकीय सहायता प्राप्त निजी शिक्षण संस्थाओं में कार्यरत वह सभी शिक्षक व कर्मचारी पेंशन पाने के हकदार हैं जो 1964 की पेंशन नियमावली के दायरे में आते हैं। कोर्ट ने पेंशन का लाभ सिर्फ उच्चतर प्राथमिक विद्यालयों के अध्यापकों तक सीमित करने को सही नहीं माना और इस संबंध में जारी आदेश को रद्द कर दिया है ।  कोर्ट ने इंटरमीडिएट बोर्ड द्वारा मान्यता प्राप्त शासकीय सहायता प्राप्त निजी विद्यालय के अध्यापकों को उनका प्रबंधकीय अंशदान ब्याज सहित जमा करने के लिए 2 माह का समय दिया है। तथा सरकार को आदेश दिया है कि याची गण को पेंशन का लाभ दिया जाए।

विज्ञापन

लाल साहब सिंह व अन्य की याचिका पर हाईकोर्ट ने की सुनवाई
लाल साहब सिंह व अन्य की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश न्यायमूर्ति अश्वनी कुमार मिश्र ने दिया। याचीगण के अधिवक्ता रामकृष्ण यादव का कहना था कि याचीगण धर्मराजजी देवी गंगा प्रसाद सिंह उच्चतर माध्यमिक विद्यालय जौनपुर में सहायक अध्यापक है। शुरू में यह उच्चतर प्राथमिक विद्यालय था 1986 में इसे हाई स्कूल की मान्यता मिल गई। याचीगण रिटायर हो चुके हैं। तथा रिटायरमेंट के बाद उन्होंने 5 फरवरी 17 को जारी शासनादेश के तहत पेंशन के लिए अपना प्रबंधकीय अंशदान ब्याज सहित जमा करने की पेशकश की। मगर उसे यह कहकर के खारिज कर दिया गया की उक्त शासनादेश का लाभ सिर्फ उच्चतर प्राथमिक विद्यालय के अध्यापकों के लिए है ।
 

अधिवक्ता ने कहा कि अंशदान जमा करने के लिए जारी की गई थी कट आफ डेट

अधिवक्ता ने हाईकोर्ट द्वारा बुद्धि राम किसने दिए निर्णय का हवाला देते हुए कहा कि इस केस में हाईकोर्ट ने यह स्पष्ट कर दिया है कि पेंशन योजना का लाभ पाने के हकदार वह सभी लोग हैं जो 1964 की पेंशन नियमावली के दायरे में आते हैं। जबकि सरकारी अधिवक्ता का कहना था की 22 मई 2006 के शासनादेश के जरिए अंशदान जमा करने हेतु कट ऑफ डेट जारी की गई थी। मगर याची ने नियत तिथि के भीतर अपना अंशदान जमा नहीं किया।  याची गण का कहना था की 2006 का शासनादेश उनको कभी उपलब्ध ही नहीं कराया गया। तथा याची गण को योजना की जानकारी 2017 में जारी शासनादेश के आधार पर हुई और तब उन्होंने कट ऑफ डेट के भीतर ही अपना अंशदान जमा करने की पेशकश की थी, जिसे अस्वीकार कर दिया गया।
विज्ञापन

कोर्ट ने कहा कि शासनादेश सिर्फ उच्च प्राथमिक विद्यालयों तक सीमित नहीं
 
2006 के शासनादेश द्वारा जो कट ऑफ डेट जारी की गई थी उसे हाईकोर्ट ने बुद्धि राम केस में रद्द कर दिया था तथा 2017 का शासनादेश हाईकोर्ट द्वारा बुद्धि राम केस में दिए निर्णय के अनुपालन में जारी किया गया है। कोर्ट ने कहा कि इस शासनादेश को सिर्फ उच्च प्राथमिक विद्यालयों तक सीमित नहीं रह सकता है, बल्कि इसका विस्तार उन सभी शिक्षण संस्थाओं तक होगा जो 1964 की पेंशन नियमावली के दायरे में आते हैं। सरकार से अपेक्षा की जाती है कि वह शासनादेश का लाभ ऐसे सभी शैक्षणिक संस्थानों के कर्मचारियों को समान रूप से देगी। कोर्ट ने याचीगण को पेंशन भुगतान न करने का 2 अगस्त 2017 का आदेश रद्द कर दिया है तथा 2 माह के भीतर याचीगण का ब्याज सहित अंशदान जमा करवा कर पेंशन भुगतान का आदेश दिया है। उल्लेखनीय है कि प्रदेश सरकार ने 1964 से शासकीय सहायता प्राप्त निजी विद्यालयों के अध्यापकों व कर्मचारियों को भी पेंशन देने का निर्णय लिया जो मान्यता प्राप्त थे।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें