सख्ती के बावजूद शहर में बड़े पैमाने पर बिजली चोरी का खुलासा होने के बाद हड़कंप मच गया है। केबिल क्रास, मीटर बाईपास के अलावा अन्य तरीकों से प्रतिमाह 40 करोड़ रुपये से अधिक की बिजली चोरी हो रही है। नगरीय विद्युत वितरण डिवीजनों के अधिकांश फीडरों पर 50 प्रतिशत लाइन लॉस का पता चलने के बाद उच्चाधिकारियों के माथे पर बल पड़ गए हैं। इस मामले में पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम के एमडी गोविंद राजू ने 22 अवर अभियंताओं को प्रतिकूल प्रविष्टि दे दी है।
साथ ही इसके लिए जिम्मेदार कुछ अभियंताओं पर गाज गिरने के भी संकेत मिले हैं। लगातार कांबिंग, छापेमारी के बावजूद शहर में बिजली चोरी पर अंकुश लगाने में महकमा फेल हो गया है। हाल में ही कराई गई जांच में बड़े पैमाने पर बिजली चोरी होने की जानकारी मिली है। बीते फरवरी महीने में शहर के कल्याणी देवी, करेली, करेलाबाग, म्योराबाद, पानी की टंकी, मिशन क्रासिंग समेत 123 फीडरों पर 30 से 50 फीसदी लाइन लास पाया गया है।
जितनी बिजली की खपत हो रही है, उसके मुकाबले आधा ही रकम आ रही है। शहर में महीने भर में 102 करोड़ रुपये से अधिक की बिजली की खपत है, जबकि 50-60 करोड़ रुपये की ही बिलिंग हो पा रही है। अधिशासी अभियंताओं के स्तर से फीडरों पर लाइन लॉस की जांच कराए जाने केबाद रिपोर्ट एमडी को भेजी गई थी। इस मामले में एमडी ने 22 अवर अभियंताओं को प्रतिकूल प्रविष्टि दी है। साथ ही बिजली चोरी रोकने के लिए कड़े कदम उठाने का निर्देश दिया है।
मुख्य अभियंता एमसी शर्मा ने बिलिंग एजेंसी एनसाफ्ट रीडिंग में सुधार लाने की चेतावनी दी है। एक्सईएन ओपी मिश्रा ने बताया कि शहर में सर्वाधिक लाइन लॉस वाले फीडरों की रिपोर्ट पर कार्रवाई शुरू कर दी गई है। साथ ही बिलिंग एजेंसी को चेताया गया है कि वह रीडिंग में कतई गड़बड़ी न होने दे। इसके लिए बिलिंग एजेंसी एन साफ्ट को चेताया गया है। साथ ही निगरानी बढ़ा दी गई है, ताकि बिजली चोरी पर अंकुश लगाया जा सके।