इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 24 घंटे के भीतर एफआईआर दर्ज न होने पर बिजली चोरी के मामले में पूरी आपराधिक कार्यवाही को निरस्त कर दिया। कोर्ट ने कहा कि विद्युत अधिनियम में निर्धारित समय-सीमा का पालन अनिवार्य है।
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 24 घंटे के भीतर एफआईआर दर्ज न होने पर बिजली चोरी के मामले में पूरी आपराधिक कार्यवाही को निरस्त कर दिया। कोर्ट ने कहा कि विद्युत अधिनियम में निर्धारित समय-सीमा का पालन अनिवार्य है। यह आदेश न्यायमूर्ति अनीश कुमार गुप्ता की एकल पीठ ने सतीश कुमार भारती उर्फ छोटू की याचिका पर दिया।
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याचिका में चंदौली के एंटी पावर थेफ्ट थाने में 2020 में दर्ज एफआईआर और उससे संबंधित समस्त आपराधिक कार्यवाही को चुनौती दी गई थी। मामले के अनुसार, 26 अक्तूबर 2020 को बिजली विभाग की टीम ने निरीक्षण के दौरान पाया कि याची बिना वैध विद्युत कनेक्शन के सीधे लाइन से बिजली का उपयोग कर रहा था। निरीक्षण की वीडियोग्राफी भी कराई गई और बिजली आपूर्ति काट दी गई। इसके बावजूद प्राथमिकी 30 अक्तूबर 2020 को दर्ज कराई गई।
याची की ओर से अधिवक्ता ने दलील दी कि विद्युत अधिनियम के अनुसार बिजली आपूर्ति काटे जाने के 24 घंटे के भीतर एफआईआर दर्ज कराना अनिवार्य है। जिसका पालन नहीं किया गया। कोर्ट ने बिजली विभाग को निर्देश दिया कि समय-सीमा के भीतर एफआईआर दर्ज न कराने के लिए जिम्मेदार संबंधित अधिकारी के विरुद्ध नियमानुसार उचित कार्रवाई भी की जाए।