सहायक अध्यापक के पद पर समायोजन निरस्त किए जाने के विरोध में शिक्षामित्रों का धरना-प्रदर्शन शुक्रवार को भी जारी रहा। शिक्षा निदेशालय में धरना-प्रदर्शन के बाद सभी शिक्षा मित्र चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री और प्रदेश सरकार के प्रवक्ता सिद्धार्थ सिंह के राजरूपपुर स्थित आवास के बाहर पहुंच गए और वहां भी सभा की। घेराव होने पर मंत्री ने शिक्षामित्रों से मुलाकात की और आश्वस्त किया कानून के दायरे में रहते हुए जल्द ही कोई रास्ता निकाला जाएगा।
शिक्षा निदेशालय पर शिक्षामित्र संघर्ष समिति के बैनर तले धरने पर बैठे शिक्षामित्रों ने कहा कि वह 16 वर्षों से प्राथमिक स्कूलों में पढ़ा रहे हैं। उम्र अधिक हो जाने के कारण अब कोई विकल्प नहीं बचा है, जबकि सभी शिक्षामित्र स्नातक एवं बीटीसी हैं। शिक्षामित्रों ने मांग की कि प्रदेश सकार एवं शासन शिक्षामित्रों को सहायक अध्यापक पद पर बनाए रखने के लिए नया अध्यादेश बनाए, शिक्षा मित्रों के हित को ध्यान में रखते हुए सरकार पुनर्विचार याचिका दाखिल करे और उसके निर्णीत होने तक शिक्षामित्रों को समायोजित पद पर काम करने दिया जाए। शिक्षा निदेशालय में चार घंटे तक चले धरना-प्रदर्शन के बाद अपराह्न तीन बजे के आसपास सभी शिक्षामित्र प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री सिद्धार्थ नाथ सिंह के आवास पर पहुंचे और वहां धरने पर बैठ गए।
शिक्षा मित्रों ने सभा भी की। इस दौरान मंत्री शिक्षा मित्रों के पास पहुंचे और उन्हें आश्वासन दिया कि नियमों के तहत जो भी हो सकेगा, सरकार जरूर करेगी। उन्हें भी शिक्षा मित्रों से सहानुभूति है। वह शिक्षा मित्रों की पूरी बात मुख्यमंत्री तक पहुंचाएंगे। साथ ही पांच सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल की सीएम से मुलाकात भी कराएंगे। धरना-प्रदर्शन एवं सभा में जनार्दन पांडेय, वसीम अहमद, अश्विनी त्रिपाठी, अरुण कुमार सिंह, शारदा शुक्ला, नौशाद अहमद, सुनील तिवारी, प्रतिमा मिश्रा, वंदना सरोज, बीना श्रीवास्तव, विवेक मिश्र आदि मौजूद रहे।
कौशाम्बी के सांसद एवं अनुसूचित जाति मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष विनोद सोनकर के माध्यम से शिक्षा मित्रों की आवाज संसद तक पहुंच गई है। शून्यकाल के दौरान सांसद विनोद सोनकर ने शिक्षामित्रों का मुद्दा उठाते हुए उनके विनियमितीकरण की मांग की। उन्होंने संसद में कहा कि शिक्षा मित्र लंबे समय से अध्यापन कार्य कर रहे हैं और उनके पास अच्छा अनुभव है, ऐसे में सरकार की ओर से नियम बनाकर उन्हें पूर्ण अध्यापक का दर्जा दिया जाना चाहिए।