जमानत मिलने के बावजूद कमजोर आर्थिक स्थिति के कारण जेल से रिहा नहीं हो पा रहे 35 बंदियों को शीघ्र ही जेल से रिहाई मिल जाएगी। इस दिशा में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण इलाहाबाद के तहत काम कर रहे लीगल एंड डिफेंस काउंसिल सिस्टम ने पहल की है। मुख्य प्रतिरक्षा अधिवक्ता विकास गुप्ता, उप प्रतिरक्षा अधिवक्ता गौरव सिंह, लवलेश त्रिपाठी, सहायक प्रतिरक्षा अधिवक्ता अभिषेक त्रिपाठी और विभा पांडेय ने ऐसे 35 बंदियों की रिहाई के लिए सक्षम न्यायालय में आवेदन दिया है ।
विकास गुप्ता ने बताया कि यह ऐसे बंदी हैं जो विभिन्न अपराधों में वर्षों से जेल में बंद है। अदालत से इनकी जमानत भी मंजूर हो चुकी है मगर आर्थिक तंगी या कोई पैरोकार न होने के कारण जमानत राशि नही जमा कर सके । लिहाजा इनकी जेल से रिहाई नही हो पाई। हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने ऐसे बंदियों की रिहाई करने का निर्देश दिया है जो जमानत मिलने के बावजूद जेल में बंद है।
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने भी विधिक सेवा प्राधिकरण को निर्देश दिया जाए है कि आर्थिक रूप से कमजोर बंदियों की रिहाई के लिए न्यायालय में जमानत राशि कम करने हेतु प्रार्थना पत्र दिया जाए और न्यायालय उस पर आदेश पारित करें। इस क्रम में 35 प्रार्थना पत्र दिए गए हैं जिनमें अब तक 17 प्रार्थना पत्रों पर न्यायालय ने जमानत राशि में ढील देते हुए बंदियों से व्यक्तिगत बंध पत्र लेकर रिहा करने का आदेश जारी किया है।
मुख्य प्रतिरक्षा अधिवक्ता विकास गुप्ता का कहना है कि जल्द ही अन्य प्रार्थना पत्रों पर भी आदेश पारित होगा । उन्होंने बताया कि नैनी जेल में ऐसे सैकड़ों बंदी हैं इन सभी की रिहाई का लीगल एड डिफेंस काउंसिल सिस्टम की ओर से प्रयास किया जाएगा ताकि जिलों में भीड़ को कम किया जा सके और अनावश्यक रूप से जेल में बंद लोगों को रिहाई मिल सके।