तीन वर्षों से औसत से कम बारिश होने का दर्द झेल रहे किसानों को अबकी इंद्र देवता मायूस नहीं करेंगे। मौसम विभाग के अनुमान से उनके चेहरे पर खुशी है। अबकी धान सहित दलहन, तिलहन की फसलें अच्छी होंगी। इसके अलावा सूखाग्रस्त इलाकों में जल संकट भी दूर हो जाएगा। मौसम विभाग इस बार औसत बारिश (886 एमएम) 104 से लेकर 110 फीसदी तक अधिक होने की संभावना जता रहा है। इसकी वजह अलनिनो का प्रभाव कम होना माना जा रहा है।
बारिश ने तीन वर्ष से लगातार किसानों का झटका दिया है। 2013 में जहां 750 एमएम बारिश हुई वहीं 2014 में यह और कम 500 एमएम रह गई। 2015 में तो इसने कई वर्षों का रिकार्ड ही तोड़ दिया। 2015 में औसत बारिश की एक चौथाई फीसदी (243 एमएम) ही हुई है। इसका सीधा असर खेती पर पड़ा। जलस्तर नीचे चला गया। इलाहाबाद विश्वविद्यालय के मौसम विज्ञानी डॉ. सुनीत द्विवेदी कहते हैं कि कम बारिश होने का कारण अलनिनो इफेक्ट रहा। 2014 में अलनिनो कम प्रभावी रहा, जबकि 2015 में यह अधिक प्रभावी रहा। इससे बारिश कम हुई है, लेकिन इस बार अलनिनो का असर नहीं रह गया है।
जून के प्रथम सप्ताह में मानसून केरल के तटों पर आ जाएगा। संभावना यह भी है कि बारिश समय से शुरू होगी और पानी औसत से अधिक बरसेगा। इसका असर फसलों पर पड़ेगा। धान के साथ ज्वार, बाजरा, तिल, उड़द सहित सभी फसलें भरपूर पैदा देंगी। अच्छी बारिश की संभावना से गंगापार के किसान राम नारायण, कैलाश, छोटे लाल, यमुनापार के किसान चंद्रशेखर, नसीम अहमद सहित जिले के अन्य किसान भी मानते हैं कि नुकसान की थोड़ी बहुत भरपाई हो जाएगी। उधर, यमुनापार के शंकरगढ़, कोरांव, मांडा सहित कई इलाकों में पानी के संकट से भी राहत मिलेगी। इलाके में जल संकट खड़ा हो गया है। तालाब, कुंआ, नहरें सब सूखी हैं।