मंझनपुर। मुख्यालय के निजी अस्पताल के अप्रशिक्षित चिकित्सक मरीजों की जान से खेल रहे हैं। अस्पताल के बाहर बोर्ड तो नामी-गिरामी चिकित्सकों का लगा होता है, लेकिन वहां इलाज करने वाला कोई और ही होता है। ताजा मामला मंझनपुर के एक निजी अस्पताल में महिला के ऑपरेशन का है। बच्चेदानी का ऑपरेशन कराने आई महिला के पेट में लापरवाह चिकित्सकों ने रुई छोड़ दी। इसके बाद दो और ऑपरेशन कर डाले। हालत बिगड़ने पर महिला को अस्पताल से जबरन डिस्चार्ज कर दिया गया। मामले की शिकायत पीड़ित परिवार ने सीएमओ से की है।
चित्रकूट जिले के पहाड़ी निवासी शिवसागर वर्मा का कहना है कि एक महीने पहले उसकी भाभी की तबीयत खराब हुई। इस पर वह इलाज के लिए मंझनपुर के निजी अस्पताल लाया। यहां चिकित्सकों ने बच्चेदानी में दिक्कत बताते हुए ऑपरेशन की सलाह दी। इसके बाद बच्चेदानी का ऑपरेशन कर दिया गया। पेशाब के लिए कैथीएटर लगाया गया था। कैथीएटर हटाने पर पेशाब में दिक्कत होने लगी। इसके बाद चिकित्सकों ने फिर से अल्ट्रासाउंड कराया। जांच में उसक पेट में रुई जैसा कुछ दिखाई दिया। इस पर दोबारा ऑपरेशन किया गया। इसके बाद भी महिला की हालत सामान्य नहीं हुई तो तीसरा ऑपरेशन किया गया।
इसके बाद भी महिला को स्वास्थ्य लाभ नहीं मिला तो अस्पताल के चिकित्सक प्रयागराज में जांच कराने के लिए ले गए। इस दौरान कई किस्त में पीड़ित परिवार से 80 हजार रुपये जमा करा लिया गए। प्रयागराज के अस्पताल संचालकों ने महिला की हालत गंभीर देख भर्ती करने से मना किया तो चिकित्सक तीमारदार के पास रहे सारे अभिलेख व जांच रिपोर्ट लेकर भाग निकले। परिवार के लोग महिला को इलाज के लिए लखनऊ ले गए हैं। घटना की शिकायत सीएमओ से की गई है।
निजी अस्पतालों की समय-समय पर जांच कराई जाती है। महिला के गलत ऑपरेशन का मामला संज्ञान में नहीं आया है। फिलहाल, जानकारी मिल रही है, उसी के आधार पर प्रकरण की जांच कराई जाएगी। जांच के बाद जो भी दोषी होगा, उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
डॉ. केसी राय, सीएमओ