पंडाल की आंतरिक सज्जा किसी चित्रकारी नहीं बल्कि ऐसी वीर नारियों को समर्पित है, जिन्होंने आजादी की लड़ाई में अपनी क्षमता, वीरता और सूझबूझ से उल्लेखनीय योगदान दिया। गैलरी में जिन ग्यारह वीरांगनाओं को शामिल किया गया है।
संगमनगरी में विविधतापूर्ण दुर्गा पूजा पंडालों की समृद्ध परंपरा के क्रम में शिवाजी पार्क अल्लापुर स्थित रामानंद नगर बीएचएस दुर्गा पूजा कमेटी का विशिष्ट स्थान है। हर बार नई थीम के साथ दर्शकों से नाता जोड़ने वाली कमेटी ने इस बार आजादी के अमृत महोत्सव और नारी सशक्तिकरण दोनों के संगम को संजोते हुए पूजा पंडाल को सजाया है।
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पंडाल की आंतरिक सज्जा किसी चित्रकारी नहीं बल्कि ऐसी वीर नारियों को समर्पित है, जिन्होंने आजादी की लड़ाई में अपनी क्षमता, वीरता और सूझबूझ से उल्लेखनीय योगदान दिया। गैलरी में जिन ग्यारह वीरांगनाओं को शामिल किया गया है, उनमें एनी बेसेंट, एवी कुट्टीमालु अम्मा, मातांगिनी हाजरा, राजकुमारी गुप्ता, झलकारी बाई, रानी लक्ष्मीबाई, सरोजिनी नायडू, प्रीतिलता वाद्देदार, कैप्टन लक्ष्मी सहगल, हंसा मेहता और राजकुमारी अमृत कौर के नाम शामिल हैं।
‘अमर उजाला’ से मुलाकात में कमेटी के मीडिया प्रभारी योगेश कुमार वैश्य ने कहा, नारी सशक्तिकरण के संदेश के साथ आजादी के अमृत महोत्सव पर ऐसी वीरांगनाओं को याद करना कमेटी का संकल्प रहा। इसी थीम पर कोलकाता के कारीगरों ने 50 फीट चौड़े, 70 फीट ऊंचे इको फ्रेंडली पंडाल में वीरांगनाओं के लिए 25 फीट की गैलरी बनाई। कमेटी की महिला मंडल अध्यक्ष अनुराधा त्रिपाठी बोलीं, वीरांगनाओं को समर्पित पंडाल में देवी प्रतिमा को भी तिरंगे में ही सजाया गया है।
Prayagraj News : पूजा पंडालों में गुप्तदान के लिए लगा बार कोड।
- फोटो : अमर उजाला।
गैलरी में शामिल वीरांगनाएं
एनी बेसेंट
प्रसिद्ध थियोसोफिस्ट, समाज सुधारक, राजनैतिक मार्गदर्शक एनी बेसेंट आयरिश मूल की महिला थी, जिन्होंने भारत को अपना दूसरा घर मान लिया था। वह भारतीयों के अधिकारों के लिए लड़ीं।
एवी कुट्टीमालु अम्मा
1932 में सविनय अवज्ञा आंदोलन से जुड़ीं एवी कुट्टीमालु अम्मा ने प्रतिबंध के आदेश का उल्लंघन करते हुए दो माह के बच्चे को बांहों में लेकर महिलाओं के एक विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व किया था।
मातांगिनी हाजरा
भारत के स्वतंत्रता संग्राम में मातांगिनी हाजरा ने 1905 में सक्रिय भूमिका निभाई। वर्ष 1942 में विरोध प्रदर्शन के दौरान लगातार तीन गोलियां लगने से उनकी मृत्यु हो गई।
राजकुमारी गुप्ता
स्वतंत्रता सेनानी राजकुमारी गुप्ता की क्रांतिकारी गतिविधियों का सच काकोरी कांड के बाद खुला। उन्होंने सेनानियों के लिए हथियार पहुंचाने की जिम्मेदारी ली थी।
झलकारी बाई
1857 के विद्रोह के दौरान झलकारी बाई ने खुद को रानी लक्ष्मी बाई के रूप में प्रस्तुत करते हुए बहादुरी से लड़ते हुए ब्रिटिश सेना में भय उत्पन्न कर दिया था।
रानी लक्ष्मीबाई
रानी लक्ष्मीबाई ने ब्रिटिश सरकार के खिलाफ 1857 के विद्रोह में सक्रिय रूप से भाग लिया। 17 जून 1858 में किंग्स रॉयल आयरिश के खिलाफ लड़ाई में वह शहीद हो गईं।
सरोजिनी नायडू
गांधी जी के विचारों से प्रभावित सरोजिनी नायडू ने अनेक राष्ट्रीय आंदोलनों का नेतृत्व किया था, वह कई बार जेल भी गईं।
प्रीतिलता वाद्देदार
बंगाल की राष्ट्रवादी क्रांतिकारी प्रीतिलता ने 1932 में चटगांव स्थित ‘डॉग्स एंड इंडियंस नॉट अलाउड’ बोर्ड वाले अंग्रेजों के क्लब को जलाकर नष्ट कर दिया था।
कैप्टन लक्ष्मी सहगल
कैप्टन लक्ष्मी सहगल नेताजी सुभाष चंद्र बोस की ओर से स्थापित आजाद हिंद फौज के लिए हाथों में बंदूक थामी और शेरनी की तरह लड़ीं।
हंसा मेहता
हंसा मेहता ने साइमन कमीशन के बहिष्कार सहित सविनय अवज्ञा आंदोलन में शराब और विदेशी वस्त्रों की दुकानों पर धरना देने में महिलाओं का नेतृत्व किया।
राजकुमारी अमृत कौर
भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान राजकुमारी अमृत कौर ने भूमिगत रेडियो स्थापित किया जो नेताओं की गुप्त सूचना, जनता तथा भारतीय कैदियों तक पहुंचाता था। 1998 में उन्हें पद्मविभूषण से सम्मानित किया गया था।
दरभंगा में भी दिखीं-निखरीं
भक्ति-देशभक्ति की छवियां
दरभंगा दुर्गा पूजा कमेटी की ओर से पूजा पंडाल में भक्ति और देशभक्ति दोनों का अद्भुत संगम किया गया है। पूजा के 65वें वर्ष में आजादी के अमृत महोत्सव के तहत अमर शहीदों, सेनानियों को याद करते हुए चंद्रशेखर आजाद, रानी लक्ष्मीबाई, शहीदे आजम भगत सिंह, खुदीराम बोस और सुभाष चंद्र बोस के कमाल के अट्आउट्स लगाए गए हैं। कमेटी के सचिव देवव्रत बासु कहते हैं, मां की प्रतिमा बनाने वाले शिल्पकारों ने ही थर्मोकोल से इन्हें आकार दिया है। इतना ही नहीं सांस्कृतिक कार्यक्रमों की पृष्ठभूमि भी तिरंगे से ही सजी है।