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प्रयागराज में लॉकडाउन के चलते 200 रुपये की टेंगरा मछली बिक रही 50 रुपये किलो

Sun, 23 May 2021 08:54 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज

सार

  • मत्स्य आखेटक बंद, हजारों मछुआरा परिवार पर भुखमरी का संकट
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prayagraj news : टेंगरा मछली - फोटो : prayagraj
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विस्तार
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कोरोना महामारी व लॉक डाउन ने  मत्स्य आखेटक और उसके व्यवसाय से जुड़े परिवारों को भुखमरी के कगार पर पहुंचा दिया है। क्षेत्र के बादपुर, मेहवा कलां, डेंगुरपुर, उमापुर, नरवर चौकठा, ओनौर, जेरा, बिझौली, टेला, किहुनी, परवा, भभौरा, मदरा, दशरथपुर, बारा, छतवा, पकरी, बढौली, तनरिया, रैपुरा, चंदापुर, दु:खी का पूरा, सिरसा, टेला आदि गांव गंगा नदी के किनारे पर बसे हुए है।

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prayagraj news : टेंगरा मछली - फोटो : prayagraj
इन गांवों में रहने वाले हजारों मछुआरा परिवारों का मुखयकार्य मत्स्य आखेटक करना लॉकडाउन की भेंट चढ़ चुका है। व्यवसाय से जुड़े महेवा कलां गांव के हीरालाल निषाद, डेंगुरपुर के संतलाल निषाद, बादपुर के दिनेश निषाद, हरीलाल, छतवा के रामआसरे, पवन, ओनौर, राधेश्याम निषाद, दारा माझी ने बताया की बरसात व ठंढ के दिनों में मत्स्य आखेटक से जुड़े मछुआरों को नमक तेल का खर्च निकलना भी भारी पड़ता है। गर्मी के तीन महीने गंगा नदी में मछली अधिक मात्रा में पाई जाती है। जिसके चलते प्रत्येक मछुआरा प्रतिदिन लगभग एक हजार रुपये की मछली पकड़ लेता है।
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prayagraj news : टेंगरा मछली - फोटो : prayagraj
इसी समय मछुआरा पूरे वर्ष के लिए विवाह-शादी व छोटे-बड़े काम और बिगड़े दिन के लिए धन इकट्ठा कर लेता है। वहीं मतस्य पालन व आखेटक इकाई मांडा के अध्यक्ष बीर बहादुर निषाद व सचिव छब्बू निषाद ने बातया की क्षेत्र में पकड़ी गई मछली जौनपुर, गोरखपुर, आजमगढ़, रुद्रपुर और बिहार स्थित मुजफरपुर के बड़ी मंडी तक भेजी जाती है। लेकिन लॉकडाउन के चलते सभी मंडी के व्यवसाई माल खरीदने से मना कर चुके है। जिसके चलते टेंगरा प्रजाति की मछली जो सामान्य दिनों में 200 रुपये प्रति किलो बिकती थी उसे 50 रुपये में खरीदार नही ले रहे है। इसी तरह सूती मछली 200 रुपये की जगह 30 में, गेगार 100 से 40 में, बैकरी 100 से 30 में, चाइना, चेलहवा, फुलिया, पहिना आदि मछली फ्री में भी कोई खरीदने वाला नहीं है। जिससे मछुआरा परिवार भुखमरी के कगार पर पहुंच चुका है।
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