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कोरोना के चलते बुखार का भी नहीं मिल पा रहा इलाज

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प्रशिक्षण के नियमों में उलझाव के कारण शहर के तमाम प्राइवेट क्लिीनिक बंद है। इस वजह से सैकड़ों मरीजों को रोज निराश होकर घर लौटना पड़ रहा है। यही हाल नर्सिंग होम का है। न तो मरीज देखे जा रहे हैं और न ही दवाएं मिल रही हैं। कोविड प्रोटोकॉल के तहत जिन दस अस्पतालों को प्रशिक्षण के बाद इमरजेंसी की अनुमति मिली है, वहां सामान्य मरीजों को इलाज नहीं मिल पा रहा है।
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कोरोना संक्रमण के कारण पहले ही सरकारी और निजी अस्पतालों में सामान्य ओपीडी बंद है।
बेहद गंभीर मरीजों को ही देखा जा रहा है। बुखार के मरीज को दवाएं अपने भरोसे लेनी पड़ रही हैं। निजी अस्पतालों को निर्देश हैं कि बुखार पीड़ितों की भर्ती नहीं की जाएगी। सोमवार को तेलियरगंज के रंजीत सिंह, दारागंज के सुरेश शर्मा को लोग कार से लेकर एक से दूसरे अस्पताल घूमते रहे, लेकिन भर्ती तो दूर किसी डॉक्टर से उनको देखा तक नहीं। एक अस्पताल में इस शर्त में सैनिटाटाइजेशन के बाद प्रवेश मिला कि पहले कोविड जांच कराएंगे फिर इलाज शुरू किया जाएगा।
निजी अस्पताल संचालकों पर कार्रवाई की तलवार लटक रही है। उत्तर प्रदेश नर्सिंग होम एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष सुशील सिन्हा के मुताबिक बिना कोविड जांच के बुखार के मरीजों को देखने की मनाही है। निर्देश हैं कि बिना कोविड जांच के बुखार पीड़ितों को भर्ती न किया जाए। ऐसे में मौसमी बुखार से पीड़ित मरीज भटकने को मजबूर हैं।
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