शिक्षा और प्रतियोगी परीक्षाओं का गढ़ में नशे का कारोबार फल-फूल रहा है। पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों के लिए यह बड़ी चुनौती बन गया है। शहर में आए दिन गांजा, स्मैक और अन्य मादक पदार्थों को पकड़ा जा रहा है। नशा तस्करी का नेटवर्क धीरे-धीरे युवाओं तक पहुंच रहा है। इसके जाल में फंसकर युवा जिंदगी तबाह कर रहे हैं।
एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स (एएनटीएफ) और पुलिस की लगातार कार्रवाई के बावजूद तस्कर नए रास्तों से खेप लेकर शहर पहुंच रहे हैं। अंतरराष्ट्रीय नशा निषेध दिवस पर सामने आए आंकड़ों के अनुसार, जून 2024 से जून 2026 तक जिले में करीब 1500 किलोग्राम गांजा, चार किलोग्राम स्मैक (हेरोइन), 1200 नशीले इंजेक्शन और 450 नशीली गोलियां बरामद की गईं। बरामद मादक पदार्थों की अनुमानित कीमत करीब 10.35 करोड़ रुपये बताई गई।
ओडिशा से शहर पहुंच रहा गांजा
एएनटीएफ की जांच में पता चला कि गांजा ओडिशा से लाया जा रहा है। वहीं, स्मैक वाराणसी और बाराबंकी के रास्ते शहर पहुंच रहा है। तस्कर परिवहन के दौरान पुलिस की नजर से बचने के लिए अलग-अलग तरीकों का सहारा लेते हैं।
42 तस्कर गिरफ्तार, संपत्ति जब्ती की कार्रवाई
पुलिस ने 42 नशा तस्करों पर एनडीपीएस एक्ट के तहत प्राथमिकी दर्ज की है। उन्हें कोर्ट से जेल भेजा गया है। इसके अलावा कार्रवाई करते हुए करीब 70 लाख रुपये की अवैध संपत्ति जब्त की गई।
कोचिंग हब और हॉस्टलों पर बढ़ी निगरानी
प्रयागराज में बड़ी संख्या में छात्र पढ़ाई के लिए आते हैं। पुलिस के अनुसार, नशा तस्कर पढ़ने वाले युवाओं को आसानी से शिकार बनाने का प्रयास करते हैं। इसी वजह से कोचिंग क्षेत्रों, हॉस्टलों और छात्र बहुल इलाकों में पुलिस की विशेष निगरानी रखी जा रही है।