जिला न्यायालय डॉ. एके बंसल की हत्या में शूटर मोहम्मद शोएब की जमानत अर्जी खारिज कर दी है। अभियुक्त की जमानत अर्जी खारिज करते हुए न्यायालय ने कहा कि यह डॉ. एके बंसल के परिजनों के विरुद्ध कारित अपराध ही नहीं अपितु सामान्य जनमानस एवं कानून व्यवस्था के विरुद्ध किया गया अपराध है।
यह आदेश जिला जज नलिन कुमार श्रीवास्तव ने डीजीसी गुलाब चंद्र अग्रहरि और बचाव पक्ष के अधिवक्ताओं को सुन कर दिया है। घटना 12 जनवरी 2017 की कीडगंज थाने की है। वादी प्रवीण कुमार बंसल ने रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि उनके छोटे भाई अश्वनी कुमार बंसल रोज की तरह ओपीडी में मरीज देख रहे थे तभी अज्ञात व्यक्ति ने आकर डॉक्टर बंसल की कनपटी पर गोली मार दी थी।
अस्पताल में इलाज के दौरान उनकी मृत्यु हो गई थी। इस प्रकरण में अभियुक्त बनाए गए मोहम्मद शोएब की ओर से प्रस्तुत जमानत अर्जी पर कोर्ट में सुनवाई की गई। बचाव पक्ष की ओर से तर्क दिया गया कि प्रथम सूचना रिपोर्ट में अभियुक्त नामजद नहीं है। अभियुक्त का नाम विवेचना के दौरान सहअभियुक्त के बयान के आधार पर सामने आया है। अभियुक्त की ओर से कहा गया है कि सहअभियुक्त अबरार उल्लाह उर्फ अबरार खान के बयान के अलावा उसके खिलाफ कोई साक्ष्य नहीं है।
उसे झूठा फंसाया गया है। घटना में उसकी कोई भूमिका नहीं है। अभियोजन की ओर से डीजीसी ने जमानत प्रार्थना पत्र का विरोध करते हुए कोर्ट को बताया कि अभियुक्त के विरुद्ध आरोप पत्र न्यायालय में दाखिल हो चुका है। अभियुक्त ने सहअभियुक्त गण मोहम्मद यासिर और मकसूद के साथ मिलकर डॉॅ. एके बंसल की भाड़े पर हत्या की है। अपराध की गंभीरता को देखते हुए कोर्ट ने जमानत अर्जी खारिज कर दी है।