पुलिस का कहना है कि दिलीप मिश्र ने ही आलोक सिन्हा के कहने पर शूटरों का इंतजाम किया था। पकडे़ गए प्रतापगढ़ के शूटर शोएब ने भी इस बात को कुबूला था। पुलिस के मुताबिक डॉ. बंसल के बेटे का एमबीबीएस में एडमीशन के लिए पैसा लेने के बाद आलोक सिन्हा ने एडमीशन नहीं कराया और फिर रकम भी नहीं वापस की थी। डाक्टर ने मुकदमा लिखाया तो उसे गिरफ्तार कर जेल भेजा गया।
इसी खुन्नस में आलोक ने डाक्टर को मरवाने की साजिश रची और इसमें दिलीप ने पूरा सहयोग किया। दिलीप मिश्र ने जेल से रिहा होने के लिए जमानत की अर्जी हाई कोर्ट में दी। पुलिस की ओर से कोर्ट में बताया गया कि दिलीप ने ही भाड़े के शूटर मुहैया कराए। न्यायालय ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद दिलीप की जमानत पर अपना फैसला सुरक्षित कर लिया है।