रोडवेज के संविदा चालकों पर दोहरी मार पड़ी है। संविदा चालकों का आरोप है कि काम करने के बावजूद जहां उन्हें एक और आधा वेतन दिया जा रहा है तो वही ऐसे चालक जो ड्यूटी पर नहीं पहुंच पा रहे हैं उन्हें अब नौकरी से बाहर करने का अल्टीमेटम दिया गया है। संविदा चालकों का कहना है कि बहुत से चालक हॉटस्पॉट वाले क्षेत्रों में फंसे हुए हैं। ऐसे में वह घर से बाहर नहीं निकल पा रहे हैं।
दरअसल शुक्रवार की रात रोडवेज संविदा चालकों ने सिविल लाइंस बस स्टेशन में प्रदर्शन कर कहा था कि कोरोना संक्रमण के बीच वह लगातार काम कर रहे हैं फिर भी रोडवेज प्रशासन उन्हें आधा वेतन ही दे रहा है। यहां विरोध करने वाले चालक रामनरेश, अनिल पांडे, राजकुमार, उमाकांत शुक्ला, अली हसन, शहीद आलम, प्रमोद कुमार तिवारी, संजय कुमार आदि ने कहा कि पहले छात्र-छात्राएं को विभिन्न जिलों में छोड़ना और उसके बाद अब श्रमिक स्पेशल ट्रेनों से आ रहे यात्रियों को प्रदेश के विभिन्न स्थानों में वह बस से छोड़ने जा रहे हैं।
अपनी जान की परवाह किए बगैर संविदा चालक अफसरों के हर आदेश का पालन कर रहे हैं। लेकिन जब तनख्वाह आई तो वह आधे ही थी । संविदा चालकों ने बताया कि बहुत से चालक हॉटस्पॉट वाले क्षेत्रों में रह रहे हैं। इस वजह से वह अपने घरों से बाहर नहीं निकल पा रहा है। इस बीच रोडवेज के एमडी राजशेखर ने सभी संविदा और नियमित ड्राइवर, कंडक्टर को चेताया है कि वह ड्यूटी पर आयैं,ऐसा ना होने पर कड़ी कार्यवाही की जाएगी।
उन्होंने यह भी कहा है कि अगर चालक परिचालक संविदा कर्मी है तो उनकी संविदा भी समाप्त की जा सकती है। इस आदेश से संविदा कर्मियों के मन में खौफ आ गया है। इस बारे में रोडवेज के क्षेत्रीय प्रबंधक टीकेएस बिसेन का कहना है कि संविदा चालकों के आरोप बेबुनियाद हैं। लॉक डाउन लगने के बाद महीने भर तो बसों का संचालन हुआ ही नहीं। फिर भी सभी संविदा चालकों को तनख्वाह दी गई। वैसे भी नियम है कि किलोमीटर के हिसाब से ही इनका भुगतान किया जाता है। फिर भी रोडवेज प्रशासन ने सभी संविदा चालकों को वेतन दिया।