पीड़ितों को किसी से संपर्क करने का नहीं मिलता माैका
साइबर थाना प्रभारी राजीव तिवारी बताते हैं कि वास्तविकता में डिजिटल अरेस्ट कुछ नहीं होता है। इस तरह से कानून में कोई गिरफ्तारी का प्रावधान नहीं है। लेकिन, शातिर अपराधी लोगों को इतना डरा देते हैं कि वह तीन से चार घंटे वीडियो काॅलिंग पर कैद रखते हैं। इसके पीछे का मकसद होता है कि काॅलिंग से हटकर कोई किसी तरह की किसी से मदद न ले सके। बड़ी रकम का भुगतान न करने तक पीछा करते हैं।
क्या कहते हैं एक्सपर्ट
यूपी पुलिस के साइबर सलाहकार राहुल मिश्रा बताते हैं कि डिजिटल अरेस्ट में अधिकतर वीडियो काॅलिंग सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के अलावा विदेशी नंबरों में आती है। पिछले दिनों साइबर पुलिस ने इस तरह के कई नंबरों को ब्लाॅक कराया है। अगर किसी के पास इस तरह का फोन आए तो वह स्क्रीन रिकॉर्डिंग के जरिये वीडियो काॅल को रिकॉर्ड करे। पैसा बिलकुल न भेजे।
इन तरीकों से करते हैं डिजिटल अरेस्ट
-नकली पुलिस अधिकारी बनकर
-इनकम, कस्टम, सीबीआई इंस्पेक्टर बनकर
-बेटे को गिरफ्तार करने पर
-दस्तावेज पर खरीदा गया अवैध सामान
यहां-यहां करें शिकायत
साइबर हेल्पलाइन 1930
डायल-112
cybercrime.gov.in