सीएमओ के हस्तक्षेप के बाद शुरू हुआ उपचार
डॉक्टरों का कहना था कि दोनों बुजुर्ग सिविल लाइंस में मिले हैं। ऐसे में उनको बेली अस्पताल ले जाना चाहिए। एंबुलेंस कर्मियों ने जब डॉक्टरों से कहा कि हालत गंभीर है, इसलिए दोनों बुजुर्गों का इलाज शुरू कर दें तो डॉक्टर नियमों का हवाला देने लगे। इसके बाद एंबुलेंस कर्मियों ने सीएमओ डॉ. नानक सरन को पूरे मामले की जानकारी दी। सीएमओ ने जब मामले में हस्तक्षेप किया तब दोनों बुजुर्गों का इलाज शुरू हो सका।
इस पूरे प्रकरण में करीब डेढ़ घंटे तक जहरखुरानी के शिकार बुजुर्ग स्ट्रेचर पर ही पड़े रहे। एंबुलेंस कर्मियों ने बताया कि नियमों के अनुसार मरीजों को नजदीकी अस्पताल जाने का निर्देश है। घटना स्थल से कॉल्विन अस्पताल की दूरी करीब सवा तीन किलोमीटर ही है, जबकि बेली अस्पताल की दूरी करीब 4 से 5 किलोमीटर है। इसी कारण वह बुजुर्गों को लेकर कॉल्विन अस्पताल पहुंचे थे।
सिविल लाइंस में मिले बुजुर्गों को बेली अस्पताल ही लेकर जाना चाहिए, क्योंकि वह नजदीक पड़ता है। लेकिन अगर एंबुलेंस कर्मी गलती से उन्हें लेकर कॉल्विन पहुंच गए तो इमरजेंसी में मौजूद डॉक्टरों को इलाज से इनकार नहीं करना चाहिए था। पूरे प्रकरण की जांच करायी जाएगी। -डॉ. इंदू कनौजिया, प्रमुख चिकित्सा अधीक्षक, कॉल्विन अस्पताल