डॉक्टर की मौत के मामले में छह दिन बाद भी पुलिस किसी नतीजे पर नहीं पहुंच सकी है। अब तक सामने आए साक्ष्य, संबंधितों के बयाने से हत्या, खुदकुशी व हादसे की कुल तीन थ्योरी निकलकर आई हैं। इन तीनों पर अलग-अलग जांच पड़ताल की जा रही है।
मोती लाल नेहरू मेडिकल कॉलेज के जूनियर डॉ. कार्तिकेय श्रीवास्तव का मोबाइल व अन्य वैज्ञानिक साक्ष्य शुक्रवार को जांच के लिए फोरेंसिक लैब भेज दिए गए। इनमें नीओवेक इंजेक्शन के वह दो वाॅयल भी शामिल हैं जिन्हें डाॅक्टर की कार से बरामद किया गया था।
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डॉक्टर की मौत के मामले में छह दिन बाद भी पुलिस किसी नतीजे पर नहीं पहुंच सकी है। अब तक सामने आए साक्ष्य, संबंधितों के बयाने से हत्या, खुदकुशी व हादसे की कुल तीन थ्योरी निकलकर आई हैं। इन तीनों पर अलग-अलग जांच पड़ताल की जा रही है।
फिलहाल छह दिन की जांच में कोई भी ऐसा ठोस सबूत हाथ नहीं आया है, जिससे कि कोई एक थ्योरी को साबित किया जा सके। यही वजह है कि इस मामले में वैज्ञानिक साक्ष्यों की भूमिका बेहद अहम हो गई है। इसी क्रम में शुक्रवार को पुलिस ने डॉक्टर का मोबाइल व अन्य वैज्ञानिक साक्ष्य परीक्षण के लिए फोरेंसिक लैब में भेज दिए।
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उधर विसरा की एफएसएल रिपोर्ट जल्द मंगाने के लिए भी पत्राचार किया गया है। दूसरी ओर विवेचक कोतवाली इंस्पेक्टर रोहित कुमार तिवारी एक बार फिर एसआरएन अस्पताल पहुंचे। उन्होंने अस्पताल प्रशासन से घटना वाले दिन जूनियर डॉक्टरों की उपस्थिति व आने-जाने के समय के संबंध में रिकॉर्ड भी उपलब्ध कराने की मांग की है।