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होली पर हाथ न मिलाएं,दूर से नमस्ते करें: मोरारी बापू

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do not shake hand do the namaste- morari bapu - फोटो : CITY DESK
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जग विख्यात मानस कथा मर्मज्ञ संत मोरारी बापू ने रविवार को मानस अक्षयवट कथा के आखिरी दिन अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर जहां नारी शक्ति के स्वरूपों की व्याख्या की, वहीं रंगों के त्योहार होली पर तेजी से फैल रहे कोरोना वायरस से बचने के लिए सजग रहने का संदेश भी दिया। उन्होंने कहा कि जिस तरह विश्व भर में इस खतरनाक बीमारी के वायरस फैल रहे हैं, उसे देखते हुए होली में रासायनिक रंगों से परहेज किया जाना चाहिए, जिनसे नुकसान का खतरा है। उन्होंने पानी भी कम बहाने की सलाह दी। कहा कि होली पर लोग एक-दूसरे केचेहरे पर रंग लगाते हैं, ऐसे में रंग खेलते समय कोरोना वायरस से बचाव के लिए बताए जा रहे उपायों को जरूर अपनाएं।
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संगीतमय कथा के आखिरी दिन बापू ने विश्वामित्र से लेकर जनक तक की विदाई के प्रसंगों की व्याख्या कर वातावरण को भावुक बना दिया। उन्होंने सुख-दुख के अलावा आपदाओं और समस्याओं के प्रति भी आगाह किया। कोरोना वायरस से उन्होंने रामकथा प्रेमियों को सजग किया। कहा कि अकारण अपने मुंह पर हाथ न लगाएं। हाथ धोते रहें और लोगों से दूरी भी बनाए रखें। इसके अलावा लोगों से हाथ मिलाने से परहेज करें और नमस्ते से ही काम चलाएं। अपने मुंह पर मास्क बांधे। बापू ने कहा कि सूर्य, चंद्रमा, पृथ्वी, वायु सब औषधियां हैं, लेकिन हम इनको भूल गए हैं। इन्हें प्रदूषित कर दिया है। बापू ने कहा कि आप बीमारी से बचाव करें, कृपा प्रभु करेगा।
उन्होंने कहा कि भगवान को संकट में ही याद नहीं करना चाहिए। प्रार्थना शांति और सुख में भी करनी चाहिए। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर मातृशक्ति के आठ स्वरूपों के बारे में बताया। कहा कि सनातन संस्कृति में मातृ शक्ति को हमेशा आगे रखा गया है। महाभारत में मातृ शक्ति के आठ स्वरूप बताए गए हैं। हाथ की तुलना उन्होंने कर्मरुपिणी से की। उन्होंने कहा कि नारी को लक्ष्मी के रूप में धन का संरक्षण करने वाली देवी माना गया है। उसे प्रजाहा भी कहा गया है। यानी वह अपनी प्रजा या अपने परिवार की रक्षिणी भी है। मातृ शक्ति को शरीरम कहा गया है। यानी जो खुद भूखे रहकर अपने बच्चों के पोषण का ख्याल रखे। मातृ लोकयात्राम होती है।
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इसका आशय मानव की लोकयात्रा में उसके योगदान से है। मां सीता भी राम की लोकयात्रा में उनके साथ थीं। उन्होंने बताया कि राम की वनवास यात्रा लोक यात्रा थी। इसे अंतिम मानव तक पहुंचने की यात्रा भी कहते हैं। मातृ शक्ति को धर्म और स्वर्गम भी कहा गया है। वह घर को स्वर्ग बनाने वाली है। मातृ शक्ति को पितरों का उद्धार करने वाली देवी भी माना जाता है। इस मौके पर संत कृपा सनातन संस्थान की ओर से कथा के संयोजक मदन पालीवाल, मंत्रराज पालीवाल, महामंडलेश्वर संतोष दास सतुआ बाबा समेत तमाम लोग उपस्थित थे।
राम कथा के विराम की घोषणा पर हजारों श्रद्धालु भावुक हो उठे। प्रेम के आंसू छलके तो मोरारी बापू की भी आंखें नम हो गईं। श्रद्धालुओं ने जय सियाराम के जयकारे लगाए और भावभीनी भीगी आंखों से सब ने एक -दूसरे को गले लग कर विदाई दी।

do not shake hand do the namaste- morari bapu- फोटो : CITY DESK

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