चाइल्ड फिजिशियन डॉ.युगांतर पांडेय कहते हैं, कोई भी टीका 100 फीसदी असरकारक नहीं हो सकता है। लेकिन, जिन लोगों को लगा है, कम से कम उनमें संक्रमण उतना असर नहीं दिखा पा रहा है, जितना कि गैर वैक्सीन लगवाए लोगों पर कर रहा है। इसमें कोई शक नहीं है कि वैक्सीन का असर तो है। वरिष्ठ माइक्रोबॉयोलॉजिस्ट डॉ.उपमा नारायण कहती हैं, वैक्सीन लगने के बाद जिन तीनों चिकित्सकों की मौत हुई है, वे सभी ओल्ड एज के थे। हो सकता है उनमें वैक्सीन उतनी असरकारक न हुई हो। एंटीबॉडी पूरी तरह से न बन सकी हो। ओल्डएज होना भी मौत होने की मुख्य वजह हो सकती है। बाकी, सामान्य तौर पर वैक्सीन से लोगों की सुरक्षा तो हो ही रही है नहीं तो आईसीयू या अन्य वार्डों में कोविड की ड्यूटी कर रहे चिकित्सकों, पैरामेडिकल स्टॉफ का काम करना मुश्किल हो जाता।
स्वास्थ्य विभाग के जिला प्रतिरक्षण नियंत्रण अधिकारी एसीएमओ डॉ.तीरथलाल कहते हैं, टीके के परिणाम को लेकर अभी कोई ऐसी रिपोर्ट नहीं है, जिससे इस पर सवाल खड़े किए जा सकें। फिलहाल इसके बेहतर परिणाम सामने देखने को मिल रहे हैं। उधर, मोती लाल नेहरू मेडिकल कॉलेज के कोरोना प्रभारी डॉ.सुजीत कुमार कहते हैं कि कॉलेज के तकरीबन 70 फीसदी लोग संक्रमित हुए लेकिन किसी को भर्ती होने की जरूरत नहीं पड़ी। इससे इसका असर तो बेहतर दिख रहा है। अब टीकाकरण के बाद जिन लोगों की मौत हुई है, उनके बारे में अध्ययन करने की जरूरत है।
उधर, शहर के चिकित्सकों के एक ग्रुप का यह मानना है कि वैक्सीन लगने के बाद एंटीबॉडी तो खूब बन रही है लेकिन वह कोरोना के संक्रमण को पूरी तरह से प्रोटेक्ट नहीं कर पा रही है। इसलिए टीके को लेकर जो भी डाटा प्रस्तुत किया गया है, उस पर फिर से काम करने की जरूरत है। वैसे टीके के बावजूद लोगों को कोविड गाइड लाइन का पालन को करना ही चाहिए ताकि सुरक्षा कवच बना रहे।