चार्ज हस्तांतरण में आनाकानी के बीच सोमवार की देर रात इंद्रजीत सिंह ग्रोवर से एनसीजेडसीसी के निदेशक का कार्यभार छीन लिया गया। कार्यकाल समाप्त होने पर राजभवन की ओर से डीएम को दायित्व सौंपने का आदेश जारी होने पर भी ग्रोवर सेवा विस्तार का हवाला देकर कुर्सी छोड़ने के लिए तैयार नहीं थे। आनाकानी पर फोर्स के साथ पहुंचे डीएम ने एक तरफा कार्यभार ग्रहण किया। डीएम ने राजभवन की ओर से नए निदेशक की तैनाती न होने तक प्रयागराज मेला प्राधिकरण के विशेष कार्याधिकारी संत कुमार श्रीवास्तव को एनसीजेडसीसी का प्रभार देखने का निर्देश जारी कर दिया है।
निदेशक चेंबर और ट्रेजरी कार्यालय दोनों पर डबल लॉक
चार्ज हस्तांतरण के बाद एनसीजेडसीसी के ट्रेजरी कार्यालय और निदेशक चेंबर को लॉक कर दिया गया। दोनों कक्षों पर एनसीजेडसीसी के ताले के बाद सिविल लाइंस पुलिस की मौजूदगी में प्रशासन की ओर भी ताले जड़े गए। साथ ही निर्देशित किया गया कि रात 8:30 बजे के बाद ट्रेजरी और निदेशक चेंबर में किसी तरह का पत्रचार या मेल नहीं किया जाएगा। दोनों कक्षों के लॉक मंगलवार की सुबह प्रभारी निदेशक की मौजूदगी में खोले जाएंगे। चाभी प्रभारी निदेशक के ही पास रखी गई है।
क्या है पूरा मामला
एनसीजेडसीसी के निदेशक का तीन वर्ष का कार्यकाल इंद्रजीत सिंह ग्रोवर 17 दिसंबर को ही पूरा कर चुके हैं। इसके बाद राजभवन की ओर से नए निदेशक की तलाश शुरू कर दी गई। इस बीच 31 दिसंबर को राज्यपाल आनंदी बेन पटेल की ओर से जारी आदेश में कहा गया कि नए निदेशक की नियुक्ति की प्रक्रिया चल रही है। इसमें समय लगने की संभावना है। ऐसे में कार्यहित में एनसीजेडसीसी के निदेशक का दायित्व डीएम प्रयागराज को सौंपा जाता है। लेकिन, ग्रोवर इस आदेश को दरकिनार कर कुर्सी पर जमे रहे। वह 14 दिसंबर को केंद्रीय संस्कृति मंत्रालय के अंडर सेक्रेटरी राजेश साहा की ओर से जारी दो वर्ष के सेवा विस्तार का पत्र दिखाते रहे।