इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि ग्राम पंचायत के कर्मचारियों के खिलाफ वसूली का आदेश जारी करने का अधिकार जिला पंचायत राज अधिकारी (डीपीआरओ) को है, डीएम को नहीं। न्यायमूर्ति प्रकाश पाडिया की एकल पीठ ने संभल के डीएम की ओर से ग्राम पंचायत सचिव अजय कुमार के खिलाफ जारी अधिभार वसूली आदेश को अवैध करार देते हुए रद्द कर दिया है।
डीएम ने विकास कार्यों में लापरवाही से हुए वित्तीय नुकसान की भरपाई के लिए अजय के खिलाफ अधिभार वसूली का आदेश जारी किया था। इसके खिलाफ सचिव ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। याची के अधिवक्ता किशन गौतम ने दलील दी कि डीएम का आदेश क्षेत्राधिकार से बाहर है। उन्होंने अजय शंकर पासी बनाम उत्तर प्रदेश राज्य मामले में समन्वय पीठ के फैसले का हवाला भी दिया।
कोर्ट ने याचिका स्वीकार करते हुए स्पष्ट किया कि डीएम को ग्राम पंचायत के सचिव या किसी सरकारी कर्मचारी के खिलाफ अधिभार का आदेश पारित करने का अधिकार ही नहीं है। पंचायत राज नियमों के नियमों के मुताबिक सचिव या कर्मचारियों पर वित्तीय नुकसान की कार्रवाई की शक्ति केवल डीपीआरओ के पास है। डीएम केवल ग्राम पंचायत के प्रधान, उप-प्रधान और निर्वाचित सदस्यों के खिलाफ ही अधिभार आदेश जारी कर सकते हैं। कोर्ट ने विभाग को स्वतंत्रता दी है कि वह नियमानुसार डीपीआरओ के जरिये याची के खिलाफ नए सिरे से दोबारा कार्रवाई शुरू कर सकता है।