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Prayagraj : हर तरफ खुशियों की दिवाली, उमेश पाल का घर रह गया खाली

Thu, 16 Nov 2023 11:34 AM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज

सार

उमेश पाल के घर दिवाली इस बार दर्द के मंजर में गुम हो गई। वह भी एक समय था जब पार्टी वाले ही नहीं, शहर के तमाम लोग हफ्ते भर पहले से ही दिवाली की खुशियां बांटने घर आने लगते थे।
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उमेश पाल के चित्र के साथ पत्नी जया पाल। - फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
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नौ महीने पहले सरेराह गोली-बम से उड़ाए गए भाजपा नेता उमेश पाल के घर इस दिवाली सन्नाटा पसरा रहा। परिवार के हर सदस्य के कलेजे में दीपों के उल्लास की जगह घर के खेवनहार को गंवाने का गम सुलग रहा है। पत्नी जया पाल की आंखों से बहती आंसुओं की लोर अभी सूखी नहीं है। कमर थाम कर पोता-पोती के सहारे बेटे के लिए आहें भरतीं-कराहतीं मां शांति देवी निकट रहे अधिकांश लोगों से नाउम्मीद हो चुकी हैं। वजह यह कि त्योहार पर पड़ोसियों ने पूछा न ही पार्टी (भाजपा) नेताओं ने।

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उमेश पाल के घर दिवाली इस बार दर्द के मंजर में गुम हो गई। वह भी एक समय था जब पार्टी वाले ही नहीं, शहर के तमाम लोग हफ्ते भर पहले से ही दिवाली की खुशियां बांटने घर आने लगते थे। आतिशबाजी, मिठाई और पकवानों की तो पूछिए ही मत, ऐसा उल्लास उमड़ता था कि खुशियों के उस फव्वारे में भीगने से शायद ही कोई बच पाया हो। लेकिन, मौत के बाद अब वही उमेश पाल का घर सूना पड़ गया है।

धनतेरस पर हाल जानने पहुंचे थे महापौर

इस दिवाली पर पड़ोसी भी झांकने नहीं आए। धनतेरस वाले दिन महापौर उमेश चंद्र गणेश केशरवानी जरूर उमेश की मां शांति, पत्नी जया और बच्चों का हाल जानने पहुंचे थे, लेकिन दिवाली का दीया लेकर आना वह भी भूल गए। न मंत्रियों, जनप्रतिनिधियों ने खबर ली, न संगठन के नेताओं ने। इस रवैये पर मां शांति देवी बिफरते हुए कहती हैं, अब किस बात की और किसकी दिवाली रह गई है, जिसे वह मनाएं। उनका तो सबकुछ लुट चुका है।

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कभी उमेश से मिलने वालों की लगी रहती थी कतार

रुंधे गले से फफकते हुए कहती हैं कि कभी दिवाली पर उमेश से मिलने वालों की कतार लगी रहती थी। सारी रात आतिशबाजी होती रहती थी, लेकिन अब वो दिन सिर्फ कहने के रह गए हैं। अब न बेटा रहा, न सुख-दुख पूछने वाला कोई अपना। बच्चों ने भी फुलझड़ियां नहीं छोड़ीं। न मिठाई आई, न पटाखे। उनके घर की दिवाली खाली रह गई। घर से बाहर तक बस पुलिस का पहरा लगा है। तबीयत खराब होने की वजह से जया पाल कोई बात नहीं कर सकीं।

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