धनतेरस पर हाल जानने पहुंचे थे महापौर
इस दिवाली पर पड़ोसी भी झांकने नहीं आए। धनतेरस वाले दिन महापौर उमेश चंद्र गणेश केशरवानी जरूर उमेश की मां शांति, पत्नी जया और बच्चों का हाल जानने पहुंचे थे, लेकिन दिवाली का दीया लेकर आना वह भी भूल गए। न मंत्रियों, जनप्रतिनिधियों ने खबर ली, न संगठन के नेताओं ने। इस रवैये पर मां शांति देवी बिफरते हुए कहती हैं, अब किस बात की और किसकी दिवाली रह गई है, जिसे वह मनाएं। उनका तो सबकुछ लुट चुका है।
कभी उमेश से मिलने वालों की लगी रहती थी कतार
रुंधे गले से फफकते हुए कहती हैं कि कभी दिवाली पर उमेश से मिलने वालों की कतार लगी रहती थी। सारी रात आतिशबाजी होती रहती थी, लेकिन अब वो दिन सिर्फ कहने के रह गए हैं। अब न बेटा रहा, न सुख-दुख पूछने वाला कोई अपना। बच्चों ने भी फुलझड़ियां नहीं छोड़ीं। न मिठाई आई, न पटाखे। उनके घर की दिवाली खाली रह गई। घर से बाहर तक बस पुलिस का पहरा लगा है। तबीयत खराब होने की वजह से जया पाल कोई बात नहीं कर सकीं।