खेल छोड़ने का फैसला लिया तो पड़ी डांट
नीतिका बताती हैं कि एक समय ऐसा भी आया जब उन्होंने खेल छोड़ने का फैसला कर लिया। जब यह बात मां को बताई तो खूब डांट पड़ी। उन्होंने मां से कहा कि खेलकर कुछ नहीं होने वाला और पैसे तो बिल्कुल नहीं मिलने वाले। हालांकि, मां ने उन्हें डांट लगाते हुए अपने लक्ष्य पर अडिग रहने के लिए प्रेरित किया। नीतिका बताती हैं कि उस दिन से उनके मन में दोबारा खेल छोड़ने का ख्याल भी नहीं आया, बल्कि दोगुनी मेहनत करने की प्रेरणा मिली। नीतिका के अनुसार उनका सपना भले ही ओलंपिक और राष्ट्रमंडल खेलों में पदक जीतने का है, लेकिन वह छोटे-छोटे लक्ष्य निर्धारित कर आगे बढ़ने का प्रयास करती हैं।
कमरे में बनाया खाना, लड़कों के साथ की तैयारी
आमतौर पर प्रयागराज में लोग प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी करने के लिए कमरा लेते हैं, लेकिन नीतिका ने पत्रिका चौराहे पर कमरा लेकर स्टेडियम में सुबह शाम अभ्यास किया। खुद ही खाना बनाकर वह अपनी फिटनेस का भी ध्यान रखती हैं। डिस्कस थ्रो के खेल में लड़कियों की संख्या कम होने के चलते उन्होंने ज्यादातर लड़कों के साथ ही अभ्यास किया और बड़ी प्रतियोगिताओं में खुद को साबित किया। खेल में उम्दा प्रदर्शन के चलते ही उन्हें वर्ष 2019 में आईटीबीपी में खेल कोटे से नौकरी मिली।