मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने 2009 के पूर्व पीएचडी करने वाले अथवा पंजीकरण कराने वाले अभ्यर्थियों को नेट से छूट देने का फैसला किया है। मंत्रालय की पहल पर इस संबंध में यूजीसी की ओर से 2009 के पूर्व पीएचडी करने वाले अथवा पंजीकरण कराने वालों को नेट से छूट दी गई है। मंत्रालय की ओर से लिए गए इस निर्णय से देश भर के पांच लाख से अधिक पीएचडी धारकों को राहत मिलेगी। केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्रालय (एमएचआरडी) की ओर से 24 जुलाई 2015 को विश्वविद्यालयों में असिस्टेंट प्रोफेसर की नियुक्ति में नेट से छूट के लिए गठित प्रो. अरुण निग्वेकर समिति में आपसी सहमति बन गई है।
मंत्रालय की ओर से गठित कमेटी की सिफारिश के आधार पर चार अप्रैल को केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री स्मृति इरानी की अध्यक्षता में शिलांग में बैठक होने वाली है। इस बैठक में मानव संसाधन विकास मंत्री शिक्षक भर्ती के नियमों से छूट की घोषणा कर सकती है। यूजीसी की ओर से नेट से छूट का मसौदा सभी केंद्रीय विवि एवं राज्य विवि के कुलपतियों को भेज दिया गया है। इससे पूर्व यूजीसी ने कोर्ट के आदेश 2010 पर पीएचडी अध्यादेश में बदलाव करके 16 बिंदुओं का रिसर्च मानक बना दिया। इस मानक के लागू होने के बाद 2009 या उससे पीएचडी करने वाले बाहर हो गए थे। नए नियम लागू हो जाने के बाद इलाहाबाद विश्वविद्यालय सहित देश के अन्य विश्वविद्यालयों में चल रही शिक्षक भर्ती प्रक्रिया में 2009 से पूर्व पीएचडी करने अथवा पंजीकरण करवाने वालों को मौका मिल सकता है।