इससे परेशान होकर गत आठ जुलाई को सेंटीनियल के शिक्षकों ने मूल भवन के सामने सड़क पर दरी बिछाकर अपने छात्रों की कक्षाएं शुरू कर दीं। इससे मामले ने तूल पकड़ा और नौ जुलाई को घंटों चली डीएम, सीडीओ, नगर मजिस्ट्रेट समेत शिक्षा व पुलिस अधिकारियों की कार्रवाई के बाद सेंटीनियल स्कूल से कब्जा हटाया गया। इसके छात्रों को मूल भवन में प्रवेश मिला और मेथोडिस्ट चर्च स्कूल को बंद कर उसके 121 छात्रों को दूसरे स्कूलों में समायोजित करने की प्रक्रिया शुरू हुई। मामले में कार्रवाई करते हुए जिलाधिकारी ने 12 लोगों पर एफआईआर दर्ज करने का निर्देश देते हुए विभागीय जांच के आदेश भी दिए थे।
प्रमुख सचिव दीपक कुमार की ओर से जारी पत्र के अनुसार जांच में पाया गया है कि सरकारी सहायता प्राप्त स्कूल की जमीन पर मेथोडिस्ट चर्च स्कूल को मान्यता देने के प्रकरण में दोनों अधिकारियों बीएसए और तत्कालीन एडी बेसिक ने गहनता से जांच नहीं की। सहायता प्राप्त स्कूल की जमीन विभाग में बंधक होती है, जिस पर निजी स्कूल को मान्यता नहीं दी जा सकती। मान्यता देने में दोनों अधिकारियों ने घोर लापरवाही बरती है।