इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उप्र चिकित्सा परिषद लखनऊ के रजिस्ट्रार को पांच लाख रुपये की मांग पूरी न करने पर मेडिकल छात्र को इंटर्नशिप सर्टिफिकेट न देने के मामले में निर्देश दिया कि वह स्वयं देखें कि इंटर्नशिप करने का बाद भी सुभारती मेडिकल कॉलेज मेरठ के प्राचार्य व संकाय अध्यक्ष याची को प्रमाणपत्र क्यों नहीं जारी कर रहे हैं।
कोर्ट ने स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय मेरठ के कुलपति से भी इस संदर्भ में जरूरी कार्रवाई करने को कहा है। साथ ही सुभारती मेडिकल कॉलेज को नोटिस जारी कर राज्य सरकार सहित सभी विपक्षियों से याचिका पर जवाब मांगा है। यह आदेश न्यायमूर्ति डॉ. केजे ठाकर एवं न्यायमूर्ति दिनेश पाठक की खंडपीठ ने अभिषेक भारद्वाज की याचिका पर दिया है।
मामले के तथ्यों के अनुसार याची को 31 जनवरी 2017 को एमबीबीएस उत्तीर्ण करने पर उसका प्रमाणपत्र जारी किया गया। इसके बाद उसने इंटर्नशिप की। बाद में प्राचार्य व डीन ने इंटर्नशिप व स्थायी पंजीकरण प्रमाणपत्र देने से यह कहते हुए इनकार कर दिया कि वह 137 दिन गैरहाजिर रहा है। यदि वह पांच लाख रुपये जमा कर दे तो प्रमाणपत्र जारी हो जाएगा। याची के पिता ने इससे इनकार कर दिया और 137 दिन इंटर्नशिप पूरी करने को कहा। याची ने उसे पूरा भी कर लिया। फिर भी उसे प्रमाणपत्र नहीं दिया जा रहा है, जिस पर यह याचिका दाखिल की गई है।