पूरे देश में निकाली गई थीं यात्राएं
कांचिकामकोटि पीठ के शंकराचार्य जयेंद्र सरस्वती की अध्यक्षता में हुई इस धर्मसंसद में रामशिला पूजन का निर्णय लिया गया था। तब इस धर्म संसद में मार्गदर्शन के लिए देवरहा बाबा भी शामिल हुए थे। इस धर्मसंसद में लिए गए निर्णय के अनुपालन में 200 से अधिक रथ निकाले गए। इन रथों पर श्रीराम, सीता और हनुमान के विग्रहों को विराजमान कराकर पूरे देश में रथयात्राएं निकाली गईं।
विहिप के काशी प्रांत कार्यालय केसर भवन के प्रमुख सुनील सिंह बताते हैं कि देवरहा बाबा की उपस्थिति में स्वीकार किए गए अयोध्या में श्रीराम मंदिर के मॉडल डिजाइन की लाखों तस्वीरें आम जनता के बीच वितरित और प्रचारित की गईं। इसके अलावा 2.75 लाख से अधिक गांवों में श्रीराम शिला पूजन कर उन्हें अयोध्या भेजा गया। शिलान्यास 9-10 नवंबर 1989 को निर्धारित स्थान, तिथि और समय पर ही उत्साह और उमंग के साथ किया गया।
विहिप के कार्यालय प्रमुख सुनील सिंह के मुताबिक 1989 के महाकुंभ में आने वाले संतों-भक्तों को धर्म संसद की प्रत्येक कार्यवाही से परिचित कराने के लिए पूरे मेला क्षेत्र में 1500 से अधिक लाउडस्पीकर लगाए गए थे, ताकि महाकुंभ में आए लाखों साधु-संत जहां भी ठहरे हों, धर्म संसद की पूरी जानकारी सीधे प्राप्त कर सकें।