वाणिज्य कर विभाग के अफसरों की मनमानी व्यापारियों पर भारी पड़ रही है। अफसर व्यापारियों को इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) के लाभ से वंचित कर रहे हैं। यह हाल तब है जब व्यापारी की खरीद, बिक्री का सत्यापन भी कर लिया गया है। इस मामले में हाईकोर्ट ने भी साफ किया है कि बिक्री का सत्यापन होने और माल बेचने के दिन तक अगर फर्म चल रही है तो व्यापारी को आईटीसी का लाभ दिया जाएगा, लेकिन अफसरों ने इस आदेश को भी दरकिनार कर दिया है। उत्तर प्रदेश उद्योग व्यापार कल्याण समिति समेत अन्य व्यापारिक संगठनों के पदाधिकारी सोमवार को यहां प्रमुख सचिव कर निबंधन वीरेश कुमार से मिलकर शिकायत करेंगे।
नियम के तहत प्रांत के अंदर विक्रेता व्यापारी जिस क्रेता व्यापारी को माल बेचेगा, उसे आईटीसी का लाभ मिलेगा। इसके लिए क्रेता व्यापारी के माल के सत्यापन की व्यवस्था है। प्रदेश भर में बड़ी संख्या में व्यापारियों के माल का सत्यापन भी अफसरों ने कर लिया है, लेकिन उन्हें आईटीसी के लाभ से वंचित किया जा रहा है। समिति के संयोजक संतोष पनामा का कहना है कि अफसरों की मनमानी इस कदर है कि सत्यापन के काफी समय बाद कुछ व्यापारियों का टिन सस्पेंड हुआ तो उन्हें भी लाभ से वंचित किया जा रहा है, जबकि हाईकोर्ट का स्पष्ट आदेश है कि यदि विक्रेता व्यापारी बोनाफाइड है और बिक्री सत्यापित हो चुकी है तो क्रेता व्यापारी को आईटीसी का लाभ मिलेगा।
न्यायालय ने यह भी साफ किया है कि माल बेचने के दिन तक फर्म चल रही है तो भी व्यापारी को लाभ से वंचित नहीं किया जा सकता है लेकिन अफसर ऐसा नहीं कर रहे हैं। उनका कहना है कि कई व्यापारियों का टिन सत्यापन के काफी बाद सस्पेंड हुआ, लेकिन अफसर यह कह कर उन्हें आईटीसी का लाभ नहीं दे रहे कि उसका टिन सस्पेंड है। अफसरों की इस मनमानी से प्रदेश भर के व्यापारी परेशान हैं। प्रमुख सचिव कर निबंधन सोमवार को यहां विकास कार्यों की समीक्षा करेंगे। उस दौरान व्यापारियों का प्रतिनिधिमंडल उनसे मिलकर अफसरों की मनमानी से उन्हें अवगत कराएंगे और आईटीसी लाभ देने की मांग करेंगे।