अन्य प्रदेशों के मुकाबले उत्तर प्रदेश में रजिस्टर्ड व्यापारियों की संख्या कम होने पर सरकार की चिंता बढ़ गई है। इसके लिए सरकार ने नया रास्ता निकाला है। वाणिज्य कर विभाग को निर्देश दिया गया कि दूसरे राज्यों की भांति कुल जनसंख्या के हिसाब से व्यापारियों के रजिस्ट्रेशन किए जाएं। सरकार के फैसले के बाद वाणिज्य कर कमिश्नर ने तीन दिन पहले आदेश जारी कर दिया है। अधिक व्यापारियों के रजिस्ट्रेशन के लिए मुख्यालय ने औषधि नियंत्रक विभाग से भी ब्योरा लेने को कहा है, जहां दवा की सभी दुकानों की सूचना होती है।
शासन ने वित्तीय वर्ष 2015-16 में कुल 1.25 लाख व्यापारियों के रजिस्ट्रेशन का लक्ष्य निर्धारित किया है, लेकिन व्यापारी रजिस्ट्रेशन को लेकर गंभीर नहीं हैं। इसने सरकार की चिंता बढ़ा दी है। ऐसे में वाणिज्य कर विभाग ने कुल जनसंख्या के हिसाब से व्यापारियों के रजिस्ट्रेशन का फैसला लिया है। वैसे पांच लाख से अधिक सालाना टर्नओवर वाले व्यापारियों के रजिस्ट्रेशन के लिए विभाग लगातार प्रयास कर रहा है। इसके लिए दुकानों की जांच करके नोटिस भी भेजा रहा है, बावजूद इसके रजिस्टर्ड व्यापारियों की संख्या नहीं बढ़ रही है।
इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि पूरे प्रदेश में दवा व्यवसायियों की संख्या 1.75 लाख है, लेकिन वाणिज्य कर विभाग में मात्र 18 हजार का रजिस्ट्रेशन है। ऐसे में कमिश्नर मुकेश कुमार मेश्राम ने सभी एडीशनल कमिश्नरों एवं ज्वाइंट कमिश्नर (एसआईबी) को निर्देश दिया कि दवा की दुकानों के साथ कर के दायरे में आने वाली अन्य दुकानों की सूचनाएं विभिन्न स्रोतों से प्राप्त कर उनका विभाग में रजिस्ट्रेशन सुनिश्चित किया जाए। चिह्नित मामलों में एसआईबी को शामिल करते हुए आवश्यकता पड़ने पर जिला प्रशासन से सहयोग लेकर जांच की जाए।