इस मौके पर उत्तर प्रदेश, मध्यप्रदेश, उत्तराखंड और झारखंड के मानसिक रोग विशेषज्ञों ने दिमाग के साइक्रेट्री पक्ष को जानने, पहचानने और निदान पर अपने अनुभव साझा किए। बताया कि किस तरह डिप्रेशन के शिकार व्यक्ति से बातचीत, मनोभावों को जानने, चेहरा देखकर रोग का उपचार किया जाए। विशेषज्ञों ने व्यवहार परिवर्तन विषय पर अपने अनुभव साझा किए।
आयोजन सचिव डॉ. सौरभ टंडन, संयोजक डॉ. विपुल मेहरोत्रा, डॉ. पुष्कर निगम के मुताबिक करीब 150 विशेषज्ञों ने अनुभव साझा किए। 50 से अधिक शोधपत्र पढ़े गए। विशेषज्ञों ने डिप्रेशन ही नहीं, नशा, गेमिंग, इंटरनेट और मोबाइल पर निर्भरता के साथ बच्चों के हाथों में मोबाइल जाने के खतरों पर भी चर्चा की। बताया गया कि बदली परिस्थितियों में बिहेवियर एडिक्शन के खतरे बताकर निदान भी सुझाए गए।