इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि आवेदन फॉर्म में अनजाने से आरक्षण की गलत श्रेणी दर्ज होने के आधार पर किसी अभ्यर्थी को परीक्षा से वंचित नहीं किया जा सकता। गलती को समय रहते आयोग को सूचित कर देता है और अनुचित लाभ नहीं मिला है तो उसे परीक्षा में शामिल होने का पूरा अधिकार है।
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इस टिप्पणी के साथ न्यायमूर्ति सिद्धार्थ नंदन की एकल पीठ ने उप्र लोक सेवा आयोग(यूपीपीएससी) की सहायक लोक अभियोजन अधिकारी (एपीओ)-2025 परीक्षा की अभ्यर्थी मनीषा गौर को परीक्षा में शामिल करने का आदेश दिया है। उसका परिणाम सीलबंद लिफाफे में रखा जाएगा, जो कोर्ट के अंतिम फैसले के अधीन होगा।
याची ने एपीओ की प्रारंभिक परीक्षा का आवेदन भरते वक्त अनजाने में स्वतंत्रता सेनानी के आश्रित उप-श्रेणी का चयन कर लिया था। अपनी गलती का पता चलने पर उन्होंने प्रवेश पत्र जारी होने के तुरंत बाद 13 मार्च 2026 को आयोग को लिखित सूचना दे दी थी। हालांकि, मुख्य परीक्षा के आवेदन में भी त्रुटि के कारण आयोग ने उनकी उम्मीदवारी निरस्त कर दी थी। इसके खिलाफ उन्हाेंने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।