तेलगु के प्रसिद्ध कवि वरवर राव के जेल में रहते हुए कोरोना पॉजिटिव पाए जाने पर प्रयागराज के साहित्यिक समाज ने चिंता जताई। सात ही गुस्से का इजहार भी किया। सिविल लाइंस स्थित महादेवी वर्मा की प्रतिमा के पास पहुंचकर कवियों, कथाकारों ने प्रदर्शन किया। इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने जेल में बंद तेलगु कवि के बेहतर इलाज और रिहाई के लिए आवाज उठाई।
प्रदर्शनकारियों ने कवि वरवर राव की रिहाई की आवाज बुलंद करते हुए कहा कि सरकार जेल में वरवर राव की जान से खिलवाड़ कर रही है। कोरोना संक्रमण काल में जब कि जेलें खाली करने की बात की जा रही है, ऐसे समय सरकार उन्हें अंतरिम जमानत तक नहीं दे रही है। जबकि, उनकी उम्र 80 साल है और वे पहले से ही कई बीमारियों से ग्रस्त हैं।
अब पता चला है कि वो कोविड-19 से ग्रस्त हो गए हैं। ऐसे समय जब वे न्यायिक हिरासत में हैं, तब उनके इलाज की जिम्मेदारी सरकार की बनती है। लेकिन, उन्हें जेजे अस्पताल में कर्मचारी छोड़कर चले गए। प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि यह कवि को मारने की सरकारी साजिश हो सकती है। प्रदर्शन के दौरान उनकी कवियों ने उनकी कविताओं का पाठ भी किया। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि यह हमला सिर्फ कवि पर नहीं, बल्कि कविता पर भी है।
उनकी कविताएं चूंकि शोषितों, वंचितों की प्रेरणा का स्रोत है। इसलिए सरकार ऐसी कविताओं और कवियों की हत्या की साजिश कर रही है। प्रदर्शनकारी हाथों में पोस्टर लिए हुए थे। भीमा कोरेगांव केस में फंसाए गए आंनद तेलतुंबडे, गौतम नौलखा, शोमा सेन, सुधा भारद्वाज, अरुण फरेरा सहित सभी 11 लोगों को निर्दोष बताया गया था।
शारीरिक दूरी का पालन करते हुए किए गए इस प्रदर्शन में अंशु मालवीय, बसंत त्रिपाठी, सूर्यनारायण, प्रो अनिता गोपेश, इप्टा से जुड़ी अनिता त्रिपाठी, रंगकर्मी अमितेश कुमार,सीमा आजाद, विश्व विजय, केके पांडेय सहित कई कवि, लेखक शामिल थे।