सामाजिक कार्यकर्ता साकेत गोखले ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश गोविंद माथुर को पत्र लिखकर हाथरस कांड के पीड़ित परिवार का नार्को टेस्ट कराए जाने के निर्णय पर रोक लगाने की मांग की है । गोखले का कहना है कि राज्य सरकार का यह निर्णय ना सिर्फ गैरकानूनी है, बल्कि पीड़ित परिवार को परेशान करने वाला भी है। गोखले का आरोप है कि पीड़ित परिवार का नार्को टेस्ट कराया जाना नैसर्गिक न्याय के सिद्धांतों के विपरीत है, क्योंकि परिवार के लोग ना तो अपराधी हैं और ना ही उन पर किसी अपराध का आरोप है।
उनका कहना है कि बृहस्पतिवार को हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने इस मामले पर स्वत: संज्ञान लेते हुए सभी संबंधित अधिकारियों व पीड़ित परिवार को अपना पक्ष रखने के लिए 12 अक्तूबर को तलब किया है। गोखले का कहना है कि पीड़ित परिवार का नार्को एनालिसिस टेस्ट कराए जाने का निर्णय हाई कोर्ट में चल रही कार्यवाही में हस्तक्षेप करना है। राज्य सरकार ने दो अक्तूबर को जारी एक आदेश में पीड़ित परिवार सहित घटना के अभियुक्तों और पुलिसकर्मियों का भी नार्को टेस्ट कराने का निर्णय लिया है।