अदालत ने कहा, शपथ आयुक्त ने जानबूझकर हलफनामा देने की प्रक्रिया का पालन नहीं किया। सो अदालत ने इसे गैर कानूनी के साथ ही अदालत से धोखाधड़ी करार देते हुए शपथ आयुक्त को तत्काल प्रभाव से बर्खास्त कर दिया। साथ ही अगले तीन वर्षो तक दोबारा नियुक्ति पर पाबंदी भी लगा दी।
इसी क्रम में शपथ आयुक्त की सील और रजिस्टर दस दिन में महानिबंधक के समक्ष देने का निर्देश दिया। अनियमित पूरक हलफनामे को निरस्त करते हुए दस हजार रुपये के जुर्माने को 15 दिन में जमा करने को कहा।
बार एसोसिएशन से भी जवाब तलब
कोर्ट ने शपथ आयुक्तों की ओर से शपथपत्रों को अभिसाक्षी के हस्ताक्षर के बिना जारी करने की प्रथा की कड़ी निंदा की। कहा,न्यायालय की ओर से बार-बार कहे जाने के बावजूद ऐसे मामलों में सक्षम प्राधिकारी और बार एसोसिएशन के पदाधिकारियों की ओर से कोई कार्रवाई नहीं की गई। इससे शपथ आयुक्त की ओर से शपथपत्रों के निष्पादन में नियमों और प्रक्रियाओं की घोर अवहेलना जारी है। कानूनी कामकाज के मानक का स्तर उच्चतम बनाए रखना सक्षम प्राधिकारी और बार एसोसिएशन का कर्तव्य है। कोर्ट ने बार एसोसिएशन से हलफनामा देकर अब तक उठाए गए कदमों की जानकारी देने के लिए भी कहा है।